बाघ का खौफनाक हमला: चंद्रपुर में तेंदू पत्ता तोड़ने गईं 4 महिलाओं की मौत, इलाके में मचा हड़कंप

Maharashtra News: चंद्रपुर जिले के सिंदेवाही तालुका से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां गुंजेवाही-पवनपार गांव के पास जंगल में एक बाघ के जानलेवा हमले में चार महिलाओं की मौत हो गई है। यह घटना शुक्रवार सुबह उस वक्त हुई, जब महिलाओं का एक समूह तेंदू पत्ता इकट्ठा करने के लिए जंगल में गया था।

एक ही हमले में चार की मौत

वन अधिकारियों के मुताबिक, यह हमला इतना अचानक और भयानक था कि पीड़ित महिलाओं को संभलने का मौका तक नहीं मिला। जंगल में तेंदू पत्ता तोड़ने गई कुल तेरह महिलाओं में से चार ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। बाकी नौ महिलाएं शोर मचाकर और चीख-पुकार कर अपनी जान बचाने में कामयाब रहीं।

मृतकों की पहचान कवदूबाई दादाजी मोहुर्ले, अनुबाई दादाजी मोहुर्ले, संगीता संतोष चौधरी और सुनीता कौशिक मोहुर्ले के रूप में हुई है। इनमें से तीन महिलाएं एक ही परिवार की बताई जा रही हैं। इस हादसे के बाद पूरे इलाके में मातम पसर गया है और ग्रामीणों के बीच बाघ का खौफ साफ देखा जा सकता है।

प्रशासन और वन विभाग की कार्रवाई

सूचना मिलने के बाद सिंदेवाही वन रेंज की अधिकारी अंजलि सायंकर और वन विभाग की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। प्रशासन ने फिलहाल ग्रामीणों को चेतावनी जारी की है। उन्हें सलाह दी गई है कि जब तक हमलावर बाघ को पकड़ा नहीं जाता या उसकी पहचान नहीं होती, तब तक वे घने जंगलों की ओर न जाएं।

वन विभाग ने इस क्षेत्र में गश्त तेज कर दी है और बाघ को ट्रैक करने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। यह क्षेत्र ताडोबा-अंधारी बाघ अभ्यारण्य के काफी करीब है, जो बाघों का बड़ा गढ़ माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आवासों के सिकुड़ने के कारण वन्यजीवों और इंसानों का टकराव लगातार बढ़ रहा है।

बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष

चंद्रपुर जिले में मानव और वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर समस्या बन चुका है। ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व में करीब दो सौ बाघ मौजूद हैं। आंकड़ों के मुताबिक, केवल जनवरी 2026 से अब तक इस जिले में बाघों के हमलों में 19 लोगों की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा इस पूरे क्षेत्र में बढ़ते खतरों की ओर इशारा करता है।

महाराष्ट्र राज्य की बात करें तो पिछले पांच वर्षों के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष में 450 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई है। ग्रामीणों की आजीविका अक्सर जंगलों पर ही निर्भर होती है, जिसके कारण उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर जंगल जाना पड़ता है। सरकार अब इस पर कोई ठोस नीति बनाने के दबाव में है।

Author: Sachin Kulkarni

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