Shimla News: हिमाचल प्रदेश के घने जंगलों में इन दिनों एक ऐसा दिव्य फल पककर तैयार हो चुका है, जिसका गहरा नाता रामायण काल से जुड़ा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चौदह वर्ष के कठिन वनवास के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण इस फल का सेवन करते थे।
पर्यटकों के सिर चढ़कर बोल रहा है इस जंगली फल का जादू
इस चमत्कारी और दिव्य फल का नाम ‘काफल’ है। इन दिनों हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे कुफरी, चायल, सिलोनबाग, कोटी, मुडाघाट और जुन्गा के पहाड़ी क्षेत्रों में काफल की बहार आ गई है। यहां घूमने आ रहे देश-विदेश के पर्यटक इस रसीले फल का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं।
काफल का स्वाद बेहद लाजवाब और खट्टा-मीठा होता है। मैदानी इलाकों से आने वाले सैलानियों के बीच इन दिनों इस पहाड़ी फल की जबरदस्त डिमांड देखी जा रही है। चिलचिलाती गर्मी के इस मौसम में पर्यटक पहाड़ों की वादियों में बैठकर इस अनोखे फल का स्वाद चखना नहीं भूलते हैं।
ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य साधन बना जानलेवा संघर्ष
स्थानीय पहाड़ी ग्रामीणों के लिए यह मौसमी फल अब आजीविका कमाने का एक बहुत बड़ा जरिया बन चुका है। ग्रामीण इलाकों के लोग सुबह होते ही घने जंगलों की तरफ निकल जाते हैं। वे दिनभर कड़ी मेहनत करके पेड़ों से काफल के दानों को बड़े चाव से इकट्ठा करते हैं।
काफल के पेड़ काफी ज्यादा ऊंचे और विशालकाय होते हैं। गांव के लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इन ऊंचे पेड़ों पर चढ़ते हैं। वे बेहद सावधानी से एक-एक दाना चुनकर अपने थैलों में भरते हैं। इसके बाद वे इसे मुख्य सड़कों के किनारे बैठकर सैलानियों को बेचते हैं।
औषधीय गुणों का अनमोल खजाना है पहाड़ों का यह फल
वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. विश्वबंधु जोशी के अनुसार काफल केवल एक फल नहीं बल्कि कई दुर्लभ औषधीय गुणों का अनमोल खजाना है। इसमें प्रचुर मात्रा में जरूरी विटामिन्स, आयरन और एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। इसके नियमित सेवन से मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी मजबूत होती है।
वैज्ञानिक शोध के मुताबिक काफल में माईरिकेटिन और ग्लाइकोसाइड्स जैसे कई महत्वपूर्ण प्राकृतिक तत्व मौजूद हैं। इसके पेड़ की पत्तियां, फल और छाल भी आयुर्वेद में रामबाण दवा की तरह इस्तेमाल की जाती हैं। इसकी हरी पत्तियों में विशेष प्रकार का लावेन 4 और हाइड्रोक्सी 3 पाया जाता है।
इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार और कई गंभीर बीमारियों से बचाव
जोगिंद्र नगर स्थित नेशनल मेडिसिनल प्लांट बोर्ड के उत्तर भारत क्षेत्रीय निदेशक ने भी इस फल की उपयोगिता पर मुहर लगाई है। उन्होंने कहा कि काफल प्रकृति का एक अनमोल और विशेष मौसमी उपहार है। यह फल शरीर को अंदर से मजबूत बनाकर उसे निरोगी रखने में मदद करता है।
काफल के सेवन से मौसमी बीमारियों सहित कई अन्य गंभीर शारीरिक विकारों से आसानी से बचाव होता है। हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में पैदा होने वाला यह पूरी तरह से प्राकृतिक और जैविक फल आजकल सेहत के प्रति जागरूक रहने वाले लोगों की पहली पसंद बन चुका है।
Author: Sunita Gupta

