भारत से दुश्मनी और चीन से दोस्ती पड़ी भारी, एफएटीएफ की इस बड़ी कार्रवाई से क्या बर्बाद हो जाएगा नेपाल?

International News: भारत का पड़ोसी देश नेपाल इस समय एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट में फंस गया है। वैश्विक संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ ने नेपाल को ब्लैकलिस्ट करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। इस बड़ी चेतावनी के बाद काठमांडू से लेकर दिल्ली तक के कूटनीतिक गलियारों में अचानक खलबली मच गई है।

नेपाल अपनी आंतरिक राजनीति और चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण भारत से लगातार दूरियां बढ़ाता रहा। इसी बीच देश में अवैध धन को वैध बनाने और संदिग्ध गतिविधियों का काला खेल तेजी से फलता-फूलता रहा। अब मनी लॉन्ड्रिंग रोकने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था एपीजी ने नेपाल को सुधरने की अंतिम चेतावनी दे दी है।

वैश्विक संस्था एपीजी ने नेपाल को दिया सिर्फ चार महीने का वक्त

विशेषज्ञ डेविड शेन की अगुवाई में एपीजी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में काठमांडू का दौरा किया। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक नेपाल के लिए यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का आखिरी मौका है। देश के पास अब अपनी वित्तीय व्यवस्था सुधारने के लिए महज चार महीने का ही बेहद सीमित समय बचा है।

इस प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय, नेपाली सेना और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। एपीजी ने नेपाल की अब तक की प्रगति रिपोर्ट को पूरी तरह निराशाजनक बताया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि नेपाल को सितंबर 2026 की समीक्षा बैठक से पहले ठोस नतीजे दिखाने होंगे।

भारत विरोधी रुख और लचर कानूनी व्यवस्था से दलदल में फंसा नेपाल

कम्युनिस्ट सरकारों के कार्यकाल के दौरान नेपाल ने जानबूझकर भारत के साथ सीमा विवाद खड़े किए थे। विवादित नक्शे जारी करके नेपाल ने सदियों पुराने सांस्कृतिक और दोस्ताना संबंधों में कड़वाहट घोल दी थी। सबसे बड़े आर्थिक और रणनीतिक मददगार भारत को नजरअंदाज करने की वजह से नेपाल की आंतरिक सुरक्षा कमजोर पड़ गई।

जब नेपाल का ध्यान भारत से विवाद करने में था, तब उसके घर में तस्कर और मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले गिरोह सक्रिय हो गए। नेपाल पुलिस और विशेष जांच एजेंसियां इन बड़े अपराधियों पर शिकंजा कसने में पूरी तरह नाकाम साबित हुईं। एफएटीएफ के मुताबिक वहां दर्ज मुकदमों की संख्या बेहद कम है।

राजनीतिक अस्थिरता और रिपोर्ट में देरी बनी नेपाल की बड़ी कमजोरी

नेपाल में लगातार गिरती-बनती सरकारों और राजनीतिक अस्थिरता के कारण जरूरी आर्थिक सुधार जमीन पर लागू नहीं हो पाए। अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं अब इस तरह के किसी भी राजनीतिक बहाने को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। नेपाल में उच्च जोखिम वाले व्यापारिक क्षेत्रों में भी कड़े नियमों का भारी अभाव देखा गया है।

इस संकट की चौथी सबसे बड़ी वजह राष्ट्रीय जोखिम मूल्यांकन रिपोर्ट सौंपने में की गई भारी लापरवाही है। नेपाल को यह महत्वपूर्ण रिपोर्ट नवंबर 2025 तक ही जमा करनी थी, जो अब तक अधूरी पड़ी है। यदि नेपाल निर्धारित समय में नहीं सुधरा, तो वह पूरी दुनिया की बैंकिंग व्यवस्था से कट जाएगा।

Author: Pallavi Sharma

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