भारतीय सेना का कड़ा रुख: वर्दी पहनकर भ्रामक वीडियो फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई, जानें पूरा मामला

New Delhi News: भारतीय सेना ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक विवादित वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सेना ने स्पष्ट किया है कि वीडियो में सैन्य वर्दी पहने दिख रहे लोग अब सेना का हिस्सा नहीं हैं। सेना ने इसे संस्थान की छवि धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।

बर्खास्त किए गए हैं वीडियो में दिख रहे लोग

सेना ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी बयान में बताया कि वीडियो में नजर आ रहे चंदू चव्हाण, हरेंद्र यादव और पी नरेंद्र को पहले ही सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। इन व्यक्तियों पर अनुशासनहीनता और गैर-सैनिक आचरण जैसे गंभीर आरोप सिद्ध होने के बाद यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी।

सेना ने स्पष्ट किया कि चौथा व्यक्ति, जो वीडियो में दिखाई दे रहा है, उसका नाम शंकर सिंह गुर्जर है। वह एक भगोड़ा है और उसके खिलाफ सैन्य अदालतों के साथ-साथ सिविल अदालतों में भी कानूनी प्रक्रिया चल रही है। सेना ने जनता को आगाह किया कि इन लोगों का सेना से अब कोई संबंध नहीं है।

प्रेस क्लब में आयोजित कांफ्रेंस से जुड़ा विवाद

यह पूरा घटनाक्रम गुरुवार को दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस के बाद शुरू हुआ। इस कांफ्रेंस में राज्यसभा सांसद मनोज झा और संजय सिंह पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान की कुछ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुए, जिसके बाद विवाद ने तूल पकड़ लिया।

सेना ने अपने आधिकारिक बयान में किसी भी राजनीतिक दल या नेता का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया है। हालांकि, वायरल हो रही तस्वीरों को ‘झूठा’ और ‘भ्रामक’ करार देते हुए सेना ने स्पष्ट किया कि इन तस्वीरों का वास्तविक घटनाक्रम से कोई लेना-देना नहीं है और इनका उद्देश्य केवल लोगों को गुमराह करना है।

भ्रामक सामग्री से बचने की अपील

सेना ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि ये बर्खास्त सैनिक जानबूझकर इंटरनेट मीडिया पर फर्जी सामग्री फैला रहे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य अपने खिलाफ हुई अनुशासनात्मक कार्रवाई और सेवा से बर्खास्तगी के मामले से जनता का ध्यान भटकाना है। सेना ने नागरिकों से ऐसी गलत सूचनाओं के प्रति सतर्क रहने की अपील की है।

सेना ने आम लोगों से आग्रह किया कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि जरूर करें। सेना का मानना है कि इस तरह की भ्रामक गतिविधियां न केवल अनुशासन के दायरे से बाहर हैं, बल्कि ये राष्ट्र की सुरक्षा और प्रतिष्ठा के लिए भी उचित नहीं हैं।

Author: Harikarishan Sharma

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