Mumbai News: मिडिल ईस्ट में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय मुद्रा बाजार में बड़ा भूचाल आया है। क्रूड ऑयल के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से आयात-निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बन गया। इसके चलते देश में अमेरिकी डॉलर की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
इस गंभीर आर्थिक संकट से निपटने और रुपये को टूटने से बचाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सीधे मोर्चा संभाला। केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में आक्रामक हस्तक्षेप किया। उसने बाजार में अचानक लगभग 4 से 5 अरब डॉलर की भारी-भरकम बिक्री कर दी।
डॉलर की ताबड़तोड़ बिक्री से रुपये में आई रिकॉर्ड रिकवरी
रिजर्व बैंक के इस बड़े एक्शन के बाद बैंकिंग सेक्टर और मुद्रा बाजार में रुपये ने जबरदस्त वापसी की। डॉलर के मुकाबले कमजोरी के सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए भारतीय रुपया मजबूती के साथ 96 के स्तर के पार निकल गया। इससे सट्टेबाजी करने वाले विदेशी मुद्रा कारोबारियों को भारी झटका लगा है।
आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को रुपया करीब 0.64% की जोरदार मजबूती के साथ 96.20 के स्तर पर बंद हुआ। इसके अगले ही कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को भी यह शानदार तेजी जारी रही। हफ्ते के आखिरी दिन रुपया और मजबूत होकर 95.93 प्रति डॉलर के बेहतरीन स्तर पर पहुंच गया।
स्थिरता लाने के लिए केंद्रीय बैंक ने अपनाई विशेष रणनीति
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि रिजर्व बैंक का इरादा रुपये को किसी खास स्तर पर फिक्स करना नहीं था। वह केवल करेंसी में आने वाली अप्रत्याशित गिरावट को रोककर बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाना चाहता था। आरबीआई आमतौर पर रोजाना केवल 1 अरब डॉलर तक ही बेचता है।
चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह क्रूड ऑयल के आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होते ही देश का आयात बिल बढ़ जाता है। पिछले कुछ हफ्तों में इसी वजह से भारतीय रुपये में करीब 2.5% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी और सख्त कदमों पर सरकार की नजर
इस पूरे मामले पर सरकार भी पूरी मुस्तैदी से नजर बनाए हुए है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने संकेत दिए हैं कि घरेलू मुद्रा को मजबूती देने के लिए कई कड़े नीतिगत फैसले लिए जा सकते हैं। आर्थिक जानकारों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी भी संभव है।
Author: Rajesh Kumar

