Gorakhpur News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में चल रहे ग्रीष्मावकाश विवाद का समाधान हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों की मांग को स्वीकार करते हुए गर्मियों की छुट्टियों की अवधि बढ़ा दी है। अब विश्वविद्यालय में 26 मई से 7 जुलाई तक ग्रीष्मावकाश रहेगा और नया शैक्षणिक सत्र 8 जुलाई से शुरू होगा।
इससे पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने 1 से 30 जून तक ही ग्रीष्मावकाश की घोषणा की थी। इस निर्णय के सामने आते ही शिक्षक वर्ग में असंतोष की स्थिति पैदा हो गई थी। शिक्षकों का तर्क था कि तय अवकाश की अवधि बहुत कम है और इसे बढ़ाया जाना बेहद आवश्यक है ताकि शैक्षणिक कैलेंडर सुचारू रूप से चल सके।
गुआक्टा की पहल और प्रशासन का रुख
मामले को शांत करने के लिए गुरुवार को गुआक्टा (GUACTA) के महामंत्री डॉ. निरंकार राम त्रिपाठी और डॉ. रविंद्र नाथ शुक्ल ने कुलपति प्रो. पूनम टंडन से मुलाकात की। शिक्षकों ने अपनी जायज मांगें कुलपति के सामने मजबूती से रखीं। कुलपति ने पूरी स्थिति को समझते हुए अवकाश बढ़ाने पर अपनी सहमति दे दी और सकारात्मक पहल की।
बैठक के तुरंत बाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने ग्रीष्मावकाश में वृद्धि का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया। इस निर्णय से शिक्षकों ने राहत की सांस ली है। शिक्षक संघ ने इसे अपनी बड़ी जीत करार दिया है। ग्रीष्मावकाश की अवधि बढ़ने से अब शिक्षकों को अपनी शैक्षणिक तैयारियों और निजी कार्यों के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
नया सत्र अब 8 जुलाई से
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अब छात्रों और शिक्षकों के लिए नया सत्र 8 जुलाई से प्रभावी होगा। इस बदलाव के साथ ही विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक कैलेंडर में भी जरूरी संशोधन कर दिए हैं। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे नए सत्र के संचालन से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट चेक करते रहें।
अकादमिक माहौल को बेहतर बनाए रखने के लिए प्रशासन और शिक्षकों के बीच बनी यह सहमति काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विश्वविद्यालय अब ग्रीष्मावकाश के बाद पूरी ऊर्जा के साथ नए सत्र के स्वागत की तैयारी कर रहा है। प्रशासनिक स्तर पर लिए गए इस फैसले ने विवाद को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
Author: Ajay Mishra


