Delhi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर गुरुवार को मंत्रिपरिषद की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। विदेश दौरे से लौटते ही प्रधानमंत्री का यह कदम सरकार के ‘मध्यावधि समीक्षा’ (Midterm Review) के रूप में देखा जा रहा है। इस उच्च स्तरीय बैठक में मंत्रियों के अब तक के कामकाज का गहन विश्लेषण किया जाएगा।
इस बैठक के दौरान सभी मंत्रालयों के प्रदर्शन को परखने के लिए मुख्य रूप से चार विशेष पैमाने तय किए गए हैं। इनमें पिछले दो वर्षों में हुए विधायी बदलाव, नियमों का सरलीकरण, नीतिगत सुधारों के जमीनी परिणाम और प्रशासनिक सुगमता शामिल है। सूत्रों का कहना है कि सरकार अब शासन को और अधिक जन-केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रही है।
मंत्रालयों के रिपोर्ट कार्ड और भविष्य का मेगा रोडमैप
बैठक में कृषि, पेट्रोलियम, वाणिज्य और ऊर्जा जैसे लगभग 12 प्रमुख मंत्रालयों द्वारा विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी खुद इन विभागों के सुधारों और भविष्य की कार्ययोजना का ब्यौरा देखेंगे। इस समीक्षा का मुख्य उद्देश्य सुशासन को गति देना और आगामी आर्थिक लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना है।
राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को लेकर एक और बड़ी चर्चा जोरों पर है कि क्या जल्द ही मोदी कैबिनेट का विस्तार होगा। सभी मंत्रालयों की रिपोर्ट पहले ही पीएमओ को सौंपी जा चुकी है। माना जा रहा है कि खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों पर गाज गिर सकती है, जबकि बेहतर काम करने वालों की जिम्मेदारी बढ़ाई जाएगी।
पश्चिम एशिया संकट और भारत की रणनीतिक अहमियत
यह महत्वपूर्ण बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति बनी हुई है। वैश्विक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री मोदी की यह घरेलू समीक्षा बैठक कूटनीतिक और रणनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य घरेलू मोर्चे पर सुधारों को तेज कर भारत की आर्थिक स्थिति को और अधिक मजबूत बनाना है।
बैठक के एजेंडे में भविष्य का रोडमैप सबसे ऊपर है, जिसमें शासन को पारदर्शी और सुलभ बनाने पर जोर दिया जाएगा। प्रधानमंत्री मंत्रियों को यह स्पष्ट संदेश दे सकते हैं कि अगले तीन वर्षों में विकास की गति को दोगुना करना है। सभी की निगाहें अब इस बैठक से निकलने वाले ठोस निर्णयों और संभावित बदलावों पर टिकी हुई हैं।
Author: Harikarishan Sharma

