West Bengal News: बंगाल की नई सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अब अवैध रूप से भारत में घुसने वालों को जेल नहीं भेजा जाएगा। उन्हें विशेष रूप से बनाए गए होल्डिंग सेंटरों में रखा जाएगा। इसके बाद बीएसएफ के जरिए उन्हें तुरंत वापस बांग्लादेश भेज दिया जाएगा।
उत्तर बंगाल के कई जिलों में इन होल्डिंग सेंटरों का निर्माण तेजी से चल रहा है। मालदा के बाद अब जलपाईगुड़ी में दो और कूचबिहार में तीन नए सेंटर बनाए गए हैं। सरकार की इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य घुसपैठ की समस्या को जड़ से खत्म करना और कानूनी प्रक्रिया को आसान बनाना है।
अब तक घुसपैठियों को पकड़ने के बाद सीधा अदालत में पेश किया जाता था। इसके बाद उन्हें जलपाईगुड़ी की केंद्रीय जेल में बंद कर दिया जाता था। सजा पूरी होने के बावजूद उन्हें वापस भेजना एक बड़ी चुनौती होती थी। वैध दस्तावेजों के अभाव में बांग्लादेश सरकार उन्हें अपना नागरिक मानने से साफ इनकार कर देती थी।
इस पुरानी व्यवस्था के कारण कई घुसपैठिए सजा पूरी करने के बाद भी सालों तक भारत में फंसे रहते थे। अब इस नई व्यवस्था से इस बड़ी समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा रहा है। पकड़े गए लोगों को सीधे होल्डिंग सेंटर में रखा जाएगा। इसके बाद तुरंत पुशबैक की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
सीमा सुरक्षा बल और बीजीबी का अहम रोल
होल्डिंग सेंटर से घुसपैठियों को सीधे सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ के हवाले कर दिया जाएगा। इसके बाद बीएसएफ के जवान बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड्स के साथ संपर्क करेंगे। दोनों देशों के सुरक्षा बलों के आपसी समन्वय से इन अवैध नागरिकों को वापस उनके देश सुरक्षित भेजने की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाएगा।
जलपाईगुड़ी जिला प्रशासन ने जिन दो होल्डिंग सेंटरों को चुना है, वे अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद करीब हैं। जलपाईगुड़ी जिले के अंदर भारत और बांग्लादेश की सीमा करीब पैंतालीस किलोमीटर लंबी है। खुली सीमा होने के कारण अक्सर कई बांग्लादेशी नागरिक आसानी से घुसपैठ कर लेते हैं। अब इन पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
जलपाईगुड़ी के जिलाधिकारी संदीप कुमार घोष ने बताया कि सरकार के नए दिशा-निर्देशों के तहत ही यह सारा काम हो रहा है। प्रशासन का पूरा जोर है कि सभी प्रक्रियाएं सख्त कानूनी दायरे में रहते हुए पूरी की जाएं। होल्डिंग सेंटरों में बुनियादी सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। यहां सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम हैं।
होल्डिंग सेंटरों में मिलने वाली सुविधाएं और नियम
इन नए होल्डिंग सेंटरों में बंदियों को अधिकतम तीस दिनों तक ही रखा जा सकता है। अधिकारियों के अनुसार यहां रहने, भोजन और चिकित्सा जैसी सभी जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी। राज्य के हर जिले में कम से कम एक ऐसा केंद्र बनाया जाएगा। इन केंद्रों में राष्ट्रीयता के सत्यापन का काम भी काफी तेजी से होगा।
सुरक्षा को लेकर प्रशासन कोई भी चूक नहीं करना चाहता है। सभी होल्डिंग सेंटरों को सीसीटीवी कैमरों से पूरी तरह लैस किया गया है। चौबीसों घंटे निगरानी के लिए पुलिस और सिविक वॉलंटियर्स की भारी तैनाती की गई है। यह कदम अवैध अप्रवासियों की समस्या से निपटने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।
Author: Sourav Banerjee

