Himachal High Court: मुख्य सचिव की नियुक्ति पर संकट के बादल, घिरे अफसर तो हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव के पद पर संजय गुप्ता की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले में सुक्खू सरकार और प्रतिवादी अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस आदेश से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। उन्होंने याचिकाकर्ता तिलक राज शर्मा की याचिका की प्रारंभिक दलीलें सुनीं। इसके बाद खंडपीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने के लिए आधिकारिक नोटिस थमाया है।

मुख्य सचिव के खिलाफ पहले से ही दर्ज हैं तीन गंभीर एफआईआर

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि प्रदेश सरकार ने पहली अक्टूबर 2025 को एक बड़ा निर्णय लिया था। इस फैसले के तहत विवादित अधिकारी को मुख्य सचिव के पद का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया था। प्रार्थी ने इस प्रशासनिक आदेश को नियम विरुद्ध बताते हुए कोर्ट से इसे रद्द करने की मांग की है।

दायर याचिका में इस बात का सनसनीखेज खुलासा किया गया है कि संजय गुप्ता के खिलाफ पहले से ही तीन एफआईआर (FIR) दर्ज हैं। ये सभी मामले सीधे तौर पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधानों से जुड़े हैं। ऐसे में प्रार्थी ने उनकी निष्पक्षता और इतने बड़े पद पर उनकी मौजूदगी पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

विजिलेंस क्लीयरेंस के संशोधित नियमों की अनदेखी करने का आरोप

सुनवाई के दौरान केंद्रीय सिविल सेवाओं और आईएएस (IAS) अधिकारियों को विजिलेंस क्लीयरेंस देने संबंधी नए नियमों का हवाला दिया गया। याचिकाकर्ता ने 9 अक्टूबर 2024 को जारी संशोधित दिशानिर्देशों का संदर्भ कोर्ट के सामने रखा। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर यह नियुक्ति की है।

इन नियमों के खंड सात के अनुसार, किसी भी संवेदनशील पद पर नियुक्ति का निर्णय लेने से पहले सक्षम प्राधिकारी को संबंधित व्यक्ति के विजिलेंस स्टेटस पर गहराई से विचार करना अनिवार्य है। इसके बिना किसी भी दागी या जांच के दायरे में आए अधिकारी को इतना महत्वपूर्ण प्रभार नहीं दिया जा सकता है।

हाई कोर्ट को यह भी याद दिलाया गया कि देश की सर्वोच्च अदालत ने समय-समय पर अपने कई फैसलों में मुख्य सचिव के पद को अत्यंत संवेदनशील माना है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, इस सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर बैठने वाले व्यक्ति का ट्रैक रिकॉर्ड पूरी तरह साफ और बेदाग होना चाहिए।

Author: Sunita Gupta

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