Mumbai News: होटल और रिसॉर्ट सेक्टर की कंपनी रास रिसॉर्ट्स एंड अपार्ट होटल्स लिमिटेड ने अपने शेयरों को BSE से स्वेच्छा से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी ने इस प्रस्ताव पर शेयरधारकों की मंजूरी लेने के लिए पोस्टल बैलेट नोटिस जारी किया है। ई-वोटिंग की प्रक्रिया 28 मई 2026 से शुरू होकर 26 जून 2026 तक चलेगी।
कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में बताया कि वह स्वैच्छिक डीलिस्टिंग नियमों के तहत यह कदम उठा रही है। रास रिसॉर्ट्स एंड अपार्ट होटल्स लिमिटेड का BSE स्क्रिप कोड 507966 है। कंपनी ने शेयरधारकों से पोस्टल बैलेट के जरिए प्रस्ताव पर अपनी राय देने की अपील की है।
डीलिस्टिंग को लेकर कंपनी ने जारी किया नोटिस
कंपनी के अनुसार 27 मई 2026 को समाचार पत्रों में सार्वजनिक विज्ञापन जारी किया गया। इसके जरिए निवेशकों को डीलिस्टिंग प्रस्ताव और मतदान प्रक्रिया की जानकारी दी गई। कंपनी का कहना है कि यह फैसला भविष्य की कारोबारी रणनीतियों और प्रबंधन की योजनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है।
रास रिसॉर्ट्स की ओर से जारी नोटिस पर कंपनी सचिव कोमल बाफना के हस्ताक्षर हैं। नोटिस में बताया गया है कि शेयरधारक NSDL के ई-वोटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ऑनलाइन मतदान कर सकेंगे। कंपनी ने इस प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखने का दावा किया है।
जानिए ई-वोटिंग की पूरी समय सीमा
ई-वोटिंग प्रक्रिया 28 मई 2026 सुबह 9 बजे से शुरू होगी। शेयरधारक 26 जून 2026 शाम 5 बजे तक अपना वोट दर्ज कर सकेंगे। कंपनी ने साफ किया है कि तय समय के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी वोट को मान्य नहीं माना जाएगा। इसलिए निवेशकों को समय सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा।
कंपनी ने कहा है कि केवल वही निवेशक मतदान कर पाएंगे जिनके नाम कट-ऑफ डेट तक कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज होंगे। निवेशकों को मतदान प्रक्रिया से जुड़ी सभी जानकारी पोस्टल बैलेट नोटिस और आधिकारिक दस्तावेजों में उपलब्ध कराई गई है।
डीलिस्टिंग से निवेशकों पर पड़ेगा असर
जब कोई कंपनी शेयर बाजार से डीलिस्ट होती है तो उसके शेयरों की ट्रेडिंग एक्सचेंज पर बंद हो जाती है। ऐसे में सार्वजनिक शेयरधारकों पर इसका सीधा असर पड़ता है। इसी वजह से कंपनी ने निवेशकों को प्रस्ताव पर अपनी राय देने का अधिकार दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार डीलिस्टिंग प्रक्रिया में निवेशकों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। शेयरधारकों के समर्थन के बिना कंपनी आगे नहीं बढ़ सकती। ऐसे मामलों में निवेशकों को सभी शर्तों और प्रस्तावों को ध्यान से पढ़ने के बाद ही अपना फैसला लेना चाहिए।
Author: Rajesh Kumar


