जजों के खिलाफ अश्लील कमेंट्स पर भड़का कलकत्ता हाई कोर्ट, क्या अब यूट्यूबर्स और ट्रोलर्स की खैर नहीं?

Kolkata News: इंटरनेट मीडिया पर जजों और अदालतों के खिलाफ बढ़ रही आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इसे न्यायपालिका की गरिमा पर गंभीर चोट माना है। इस मामले पर गहरी चिंता जताते हुए कोर्ट ने सीधे राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया है।

अदालत ने पश्चिम बंगाल पुलिस से सीधे सवाल किया है कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए उनके पास कोई नियम हैं या नहीं? कोर्ट ने पूछा है कि ट्रोलर्स पर लगाम कसने के लिए क्या पुलिस के पास कोई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) मौजूद है? इस संबंध में राज्य पुलिस महानिदेशक (DGP) को तत्काल कदम उठाने को कहा गया है।

आरजी कर और भर्ती घोटाले के फैसलों के बाद बढ़ी ट्रोलिंग

कहा जा रहा है कि शिक्षक नियुक्ति घोटाला और आरजी कर जैसे कई बेहद चर्चित मामलों में अदालती फैसलों के बाद यह विवाद बढ़ा है। इन मामलों में आदेश आने के बाद इंटरनेट मीडिया पर जजों की जमकर आलोचना की जा रही थी। आलोचकों ने आलोचना की सीमा लांघकर जजों पर अशालीन टिप्पणियां और तीखे कटाक्ष किए।

इसी गंभीर मुद्दे पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता की एकल पीठ ने मामले की कमान संभाली है। उन्होंने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया है। अदालत अब इस बेहद संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई आगामी 22 जून को करने वाली है।

यूट्यूब वीडियो में बंद कमरे की झूठी कहानियां

यह पूरा कानूनी मामला महाराज स्वामी प्रदीप्तानंद उर्फ कार्तिक महाराज की ओर से दायर की गई एक याचिका से जुड़ा हुआ है। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने इंटरनेट पर मौजूद कुछ खास यूट्यूब वीडियो का प्रमुखता से उल्लेख किया। इन वीडियो में कोर्ट की पीठ और जजों के खिलाफ बेहद अपमानजनक बातें कही गई थीं।

हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ वीडियो में जानबूझकर भ्रामक और झूठे दावे किए गए हैं। वीडियो में ऐसे संकेत दिए गए जैसे बंद कमरे में अदालत की तरफ से कोई गलत कदम उठाया जा रहा हो। जबकि हकीकत यह थी कि उस तय दिन अदालत की पीठ बैठी ही नहीं थी।

अदालत की अवमानना बर्दाश्त नहीं करेगी न्यायपालिका

न्यायमूर्ति सेनगुप्ता ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वीडियो में जजों के खिलाफ कही गई बातें पूरी तरह मानहानिकारक हैं। यह सीधे तौर पर अदालत की अवमानना का मामला बनता है, जो भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक है। ऐसी प्रवृत्तियों पर अगर समय रहते लगाम नहीं कसी गई, तो जनता का न्याय से भरोसा उठ सकता है।

अदालत ने पुलिस प्रशासन को ऐसी सामग्री को इंटरनेट से तुरंत हटाने और दोषियों पर कार्रवाई का तंत्र बनाने को कहा है। अब हर किसी की नजरें पुलिस महानिदेशक की रिपोर्ट पर टिकी हैं कि वे जजों की सुरक्षा के लिए क्या खाका पेश करते हैं। कोर्ट के इस रुख से सोशल मीडिया पर गाली-गलौज करने वालों में हड़कंप है।

Author: Sourav Banerjee

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