Surat News: सूरत महानगरपालिका (SMC) के रिकॉर्ड रूम से 9900 फाइलों के गायब होने की घटना ने पूरे प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। 1980 से अब तक के प्रापर्टी टैक्स, बिल्डिंग परमिशन और टेंडर से जुड़ी इन महत्वपूर्ण फाइलों के गुम हो जाने से अब करोड़ों का सरकारी काम ठप पड़ गया है। यह प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।
इस गंभीर मामले के कारण ठेकेदारों के 170 करोड़ रुपये के सिक्योरिटी चेक सालों से अटके हुए हैं। जब ठेकेदारों ने अपने चेक वापस मांगे, तब जाकर इस बड़े घोटाले का खुलासा हुआ। अब न केवल वित्तीय लेनदेन रुका हुआ है, बल्कि रिकॉर्ड के अभाव में लंबित कोर्ट केस और टैक्स वसूली की प्रक्रिया भी पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
प्रशासनिक जांच और राजनीतिक खींचतान
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। गायब हुई फाइलों में पुराने रिकॉर्ड्स होने के कारण अब जिम्मेदारी तय करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है और आम आदमी पार्टी ने भाजपा शासित महानगरपालिका प्रशासन पर सीधे तौर पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं।
सूरत जैसे महत्वपूर्ण शहर के प्रशासनिक केंद्र से दशकों पुराने रिकॉर्ड का गायब होना सुरक्षा और पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है। अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए अब गहन पूछताछ की जा रही है। यह देखना अहम होगा कि क्या इस जांच में किसी बड़े अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है या यह महज एक तकनीकी चूक का मामला है।
आम जनता और ठेकेदारों पर सीधा असर
फाइलों के गायब होने से शहर की विकास योजनाओं और ठेकेदारों के भुगतान पर सीधा असर पड़ा है। रिकॉर्ड रूम की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है, क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर दस्तावेजों का एक साथ गायब होना किसी सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करता है। प्रशासन के लिए अब खोए हुए डेटा को रिकवर करना और जवाबदेही तय करना प्राथमिकता है।
टैक्स वसूली और कोर्ट केसों के ठप होने से महानगरपालिका को राजस्व का भी बड़ा नुकसान होने की आशंका है। नागरिक अब यह मांग कर रहे हैं कि दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। फिलहाल, शहर के इस सबसे बड़े प्रशासनिक विवाद पर पूरे गुजरात की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर स्थानीय गवर्नेंस की विश्वसनीयता पर भी पड़ा है।
Author: Sachin Kulkarni


