अरे बाप रे! क्या फोन दूर होते ही आपके भी छूटने लगते हैं पसीने? आप हो चुके हैं इस खतरनाक दिमागी बीमारी के शिकार

Delhi News: आधुनिक दौर में स्मार्टफोन अब सिर्फ एक गैजेट नहीं रह गया है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक लोग लगातार मोबाइल स्क्रीन से चिपके रहते हैं। सोशल मीडिया, ऑनलाइन शॉपिंग और मनोरंजन के नाम पर लोग दिन का एक बड़ा हिस्सा फोन पर ही गुजार देते हैं।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फोन कुछ मिनट के लिए दूर होते ही आपको बेचैनी या घबराहट क्यों होने लगती है? मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स इस गंभीर मानसिक स्थिति को ‘स्मार्टफोन विदड्रॉल’ कहते हैं। यह एक ऐसी खतरनाक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति फोन से दूर होने पर मानसिक रूप से असहज हो जाता है।

क्या होता है स्मार्टफोन विदड्रॉल और इसके मुख्य कारण

जब किसी व्यक्ति का फोन अचानक बंद हो जाए, इंटरनेट न चले या नेटवर्क गायब हो जाए, तब उसके व्यवहार में बदलाव आने लगता है। फोन दूर होने पर मन में अजीब सा खालीपन, गुस्सा और अत्यधिक चिंता महसूस होना ही स्मार्टफोन विदड्रॉल कहलाता है।

दरअसल, सोशल मीडिया के लाइक्स, नोटिफिकेशन और मैसेज हमारे दिमाग को लगातार एक रिवॉर्ड देते हैं। इस डिजिटल स्टिमुलेशन के कारण युवाओं का दिमाग इसका पूरी तरह आदी हो जाता है। बार-बार फोन चेक करने की यह आदत धीरे-धीरे एक गंभीर मानसिक लत का रूप ले लेती है।

इन डरावने संकेतों से पहचानें अपनी मोबाइल निर्भरता

अगर आप भी बिना किसी नोटिफिकेशन के हर दो मिनट में अपना फोन अनलॉक करते हैं, तो सावधान हो जाएं। खाली समय मिलते ही तुरंत सोशल मीडिया स्क्रॉल करना और फोन पास न होने पर चिड़चिड़ापन बढ़ना इसके बेहद स्पष्ट और शुरुआती संकेत माने जाते हैं।

कई बार लोगों को जेब में फोन न होने पर भी उसके वाइब्रेट होने का भ्रम होता है, जिसे ‘फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम’ कहते हैं। रात में देर तक स्क्रीन देखने से नींद का चक्र पूरी तरह बिगड़ जाता है। यह आदत आपके ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को भी खत्म कर देती है।

मानसिक स्वास्थ्य और सोशल मीडिया का खतरनाक खेल

विभिन्न शोध बताते हैं कि स्मार्टफोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल सीधे तौर पर डिप्रेशन और तनाव को बढ़ाता है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को रोक देती है। इस वजह से लोगों को अनिद्रा की गंभीर बीमारी घेर लेती है।

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) की रिसर्च के अनुसार, सोशल मीडिया के अंतहीन वीडियो दिमाग में एक कंपल्सिव चक्र बनाते हैं। इसकी वजह से लोग कुछ मिनट भी शांत नहीं बैठ पाते हैं। अमेरिकी मनोवैज्ञानिक संघ ने भी अत्यधिक स्क्रीन टाइम को तनाव का मुख्य कारण माना है।

डिजिटल डिटॉक्स के इन आसान उपायों से खुद को बचाएं

इस मानसिक लत से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टरों ने कुछ बेहद आसान और प्रभावी उपाय बताए हैं। सबसे पहले अपने फोन के सभी गैर-जरूरी नोटिफिकेशन्स को तुरंत बंद कर दें। रात को सोने से ठीक एक घंटा पहले मोबाइल को खुद से पूरी तरह दूर रख दें।

दिनभर के कामकाज के बीच छोटे-छोटे डिजिटल ब्रेक लेने की आदत डालें। अपने फोन में ऐप्स के इस्तेमाल की एक दैनिक समय सीमा तय करें। खाली समय में सोशल मीडिया पर रील्स देखने के बजाय किताबें पढ़ने, टहलने या अपने दोस्तों से आमने-सामने बात करने की आदत डालें।

Author: Asha Thakur

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