पूरी दुनिया में लीची उत्पादन में नंबर दो पर होने के बाद भी क्यों बेदम है भारत का निर्यात, आई बड़ी रिपोर्ट

Business News: गर्मियों के खास रसीले फलों में शामिल लीची को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली आर्थिक रिपोर्ट सामने आई है। भारत पूरी दुनिया में लीची का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इसके बावजूद वैश्विक बाजारों में देश का लीची निर्यात आज भी नाममात्र का बना हुआ है।

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर के निदेशक डॉ. बिकास दास ने इस संबंध में खास जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि भारत में पहले करीब 7.2 से 8 लाख टन तक लीची का बंपर उत्पादन होता था। लेकिन पिछले साल फसल की पैदावार में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

बीते साल घटकर सिर्फ पांच लाख टन रह गया उत्पादन

नए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में बीते साल करीब 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लीची की बागवानी की गई। इस दौरान कुल उत्पादन महज 5 लाख टन के आसपास सिमट गया। हालांकि राज्यों की सूची में बिहार अब भी 1 लाख 36 हजार टन के साथ शीर्ष पर है।

बिहार के बाद पंजाब ने लीची उत्पादन में सबको चौंकाया है। पंजाब में पैदावार बढ़कर 75 हजार टन तक पहुंच गई है। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 73 हजार टन, झारखंड में 63 हजार टन, असम में 62 हजार टन और छत्तीसगढ़ में 61 हजार टन लीची का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ।

खराब कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण निर्यात पड़ा सुस्त

उत्पादन में भारी गिरावट के चलते पिछले साल भारत केवल 25 करोड़ रुपये मूल्य की लीची का ही निर्यात कर सका। डॉ. बिकास दास ने इसका मुख्य कारण बताते हुए कहा कि पेड़ से टूटने के बाद लीची की शेल्फ लाइफ अधिकतम सिर्फ दो दिनों की होती है।

भारत में पर्याप्त कोल्ड चेन और आधुनिक लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। इस वजह से हमारा लीची निर्यात सिर्फ मिडिल ईस्ट के देशों तक ही सीमित रहता है। इसके अलावा घरेलू बाजार में बढ़ती मांग और कड़े विदेशी नियम भी निर्यात की राह में बड़ी बाधा हैं।

घरेलू महानगरों में अचानक क्यों इतनी महंगी हुई लीची

देश के प्रमुख महानगरों के खुदरा बाजारों में इस बार लीची की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। इसका सीधा कारण देश में कुल उत्पादन की कमी और मांग में आई तेज बढ़ोतरी है। आपूर्ति कम होने से आम उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ गया है।

लीची में पानी की भरपूर मात्रा होने के कारण यह शरीर को हाइड्रेट रखने का सबसे बेहतरीन प्राकृतिक स्रोत है। इसी वजह से तपती गर्मियों में इसकी मांग हमेशा बहुत ज्यादा बनी रहती है। लेकिन कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था सुधारे बिना किसानों को वैश्विक फायदा मिलना मुश्किल है।

Author: Rajesh Kumar

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