वोटर लिस्ट में गड़बड़ी करने वालों की अब खैर नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के इस बड़े अधिकार पर लगाई मुहर

New Delhi News: देश में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग के पास मतदाता सूची को सुधारने के लिए विशेष अभियान चलाने का पूरा कानूनी अधिकार है।

शीर्ष अदालत ने एसआईआर के विरोध में दायर सभी याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि आयोग ने अपनी वैधानिक शक्तियों के दायरे में रहकर ही यह कदम उठाया है। इसे किसी भी कानूनी पैमाने पर अवैध या असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने उठाए तीन बेहद महत्वपूर्ण कानूनी सवाल

इस बड़े मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सभी पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुना। उन्होंने रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों का गहन विश्लेषण करने की आवश्यकता पर बल दिया। सीजेआई ने इस पूरी व्यवस्था को समझने के लिए तीन बुनियादी सवाल सामने रखे।

उन्होंने पूछा कि क्या निर्वाचन आयोग के पास ऐसी विशेष कार्रवाई का अधिकार है? क्या इस जांच का मकसद पूरी तरह जायज है और आयोग द्वारा अपनाए गए तरीके तय लक्ष्यों के अनुरूप हैं? क्या यह प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के नियमों का किसी प्रकार उल्लंघन करती है?

विशेष संशोधन प्रक्रिया को गैरकानूनी नहीं मान सकती अदालत

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि देश का कानून चुनाव आयोग को विशेष परिस्थितियों में वोटर लिस्ट में बदलाव की पूरी अनुमति देता है। जब आयोग ठोस कारणों के आधार पर कोई कदम उठाता है, तो उसे महज इसलिए अमान्य नहीं किया जा सकता है।

अदालत ने कहा कि यह विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के मूल नियमों को कमजोर नहीं करती है। बल्कि यह कानून की धारा 21(3) के तहत तय सीमाओं के भीतर काम करती है। यह संविधान के अनुच्छेद 324 के बुनियादी उद्देश्यों को और अधिक मजबूत बनाती है।

सर्वोच्च अदालत ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह सही और पारदर्शी ठहराया है। अदालत ने माना कि वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने का यह अभियान एक पवित्र उद्देश्य पर आधारित था। इस पूरी प्रक्रिया में आयोग ने सभी के साथ पूरी तरह निष्पक्ष व्यवहार किया है।

Author: Gaurav Malhotra

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