जमशेदपुर में मौत को मात देकर लौटा बुजुर्ग, 107 डिग्री बुखार और बिना बीपी के डॉक्टरों ने बचाई गार्ड की जान

Jharkhand News: जमशेदपुर के सोनारी स्थित ब्रह्मानंदम अस्पताल के डॉक्टरों ने मौत के मुंह से एक बुजुर्ग को वापस लाकर नया जीवन दिया है। भीषण गर्मी के कारण 60 वर्षीय सुरक्षा गार्ड सिविल हेस्सा गंभीर हीट स्ट्रोक का शिकार हो गए थे। अस्पताल लाते समय उनकी हालत अत्यंत चिंताजनक थी, लेकिन चिकित्सकीय टीम की मुस्तैदी ने चमत्कार कर दिखाया।

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों के सामने थी बड़ी चुनौती

जब मरीज को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, तब उनका शरीर 107 डिग्री फारेनहाइट तापमान से तप रहा था। डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि मरीज का ब्लड प्रेशर रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था। बेहोशी की हालत में पहुंचे सिविल हेस्सा की न्यूरोलॉजिकल स्थिति भी बिगड़ चुकी थी, जिससे उनकी जान पर बड़ा खतरा मंडरा रहा था।

डॉ. सुजीत कुमार, डॉ. विनायक अग्रवाल और डॉ. मुकुल पांडे की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला। मरीज को तत्काल क्रिटिकल केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों ने मरीज को लाइफ सपोर्ट यानी मैकेनिकल वेंटिलेशन पर रखा। इसके साथ ही सेंट्रल वेनस लाइन के जरिए शरीर में जरूरी दवाओं और तरल पदार्थों की आपूर्ति शुरू की गई ताकि अंगों को बचाया जा सके।

आक्रामक कूलिंग थेरेपी और सटीक उपचार से हुआ सुधार

मरीज के शरीर के बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टरों ने आक्रामक कूलिंग उपायों का सहारा लिया। इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन को ठीक करने के लिए विशेष इंट्रावेनस फ्लूइड्स दिए गए। आईसीयू की टीम ने चौबीसों घंटे मरीज की निगरानी की। डॉक्टरों की इस कड़ी मेहनत और सटीक उपचार का असर मरीज की सेहत पर सकारात्मक रूप से दिखाई देने लगा।

इलाज के दौरान 26 मई को मरीज की स्थिति में बड़ा सुधार देखा गया, जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर से हटा दिया गया। अब मरीज पूरी तरह होश में है और सामान्य रूप से सांस ले पा रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता को अपनी टीम की विशेषज्ञता और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की जीत बताते हुए स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है।

Author: Rohit Mahato

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