यूपी की इस ऐतिहासिक झील की बदलेगी सूरत, साइबेरियाई पक्षियों के ठिकाने को जैव विविधता पार्क बनाने की तैयारी शुरू

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक अलवारा झील की किस्मत जल्द ही बदलने वाली है। तपोभूमि की इस विशाल धरोहर को जलीय जैव विविधता पार्क और वेटलैंड घोषित करने की कवायद तेज हो गई है। वन विभाग ने इसके लिए शासन को एक विस्तृत और ठोस प्रस्ताव भेज दिया है।

यमुना तट पर बिखरेगा प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा रंग

यमुना नदी के किनारे करीब 405 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली अलवारा झील अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। शासन की ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन वेटलैंड’ योजना के तहत इस बड़ी झील का चयन किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक वेटलैंड का दर्जा मिलते ही यहां जलीय जीवों के संरक्षण के साथ ही कई नई सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

इस पर्यटन स्थल को पूरी तरह से इको-टूरिज्म हब के रूप में तब्दील करने का खाका तैयार हुआ है। शासन की मंजूरी मिलने के बाद यहां प्रकृति भ्रमण, नौकायन और पक्षी विहार जैसी गतिविधियां शुरू होंगी। इससे झील के पूरे पारिस्थितिक तंत्र को नया जीवन मिलेगा और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में बड़ी मदद मिलेगी।

सर्दियों में उमड़ता है सात समंदर पार के मेहमानों का मेला

कालिंदी के तट तक फैली इस झील में सर्दियों के मौसम में अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। हजारों किलोमीटर दूर साइबेरिया और अन्य देशों से रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षी यहां डेरा डालते हैं। इन दुर्लभ विदेशी परिंदों की चहचहाहट पर्यटकों और पक्षी प्रेमियों को अपनी ओर खींचती है, जिससे यह मुख्य आकर्षण बनता है।

झील के कायाकल्प और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए लगभग पांच करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। यह पूरा प्रोजेक्ट दो अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। पहले चरण के तहत पर्यटकों की सहूलियत के लिए बेहतर रास्ते, बैठने की उत्तम व्यवस्था और सौंदर्यीकरण से जुड़े बुनियादी निर्माण कार्य शुरू हो चुके हैं।

पर्यटन मानचित्र में शामिल होने के बावजूद अभी तक इस झील को रामसर स्थल का दर्जा नहीं मिल सका था। अब वन विभाग को उम्मीद है कि नए प्रस्ताव को जल्द ही हरी झंडी मिल जाएगी। इससे न सिर्फ पर्यावरण सुरक्षित होगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और कमाई के नए रास्ते भी खुलेंगे।

Author: Ajay Mishra

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