उत्तराखंड के चमोली में बद्रीनाथ धाम के पास टूटा विशाल ग्लेशियर, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो से लोगों में मची भारी दहशत

Uttarakhand News: चमोली जिले में बद्रीनाथ धाम के नजदीक कंचन गंगा नदी क्षेत्र में एक विशाल ग्लेशियर टूटने की बड़ी घटना सामने आई है। इस डरावने मंजर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में भारी मात्रा में बर्फ और बड़े-बड़े पत्थर नीचे गिरते दिख रहे हैं।

इस खौफनाक दृश्य को देखकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में गहरी चिंता और दहशत फैल गई। हालांकि जिला प्रशासन ने तुरंत स्थिति को पूरी तरह सामान्य बताया है। रविवार दोपहर जब यह वीडियो सामने आया, तो कंचन गंगा में तेजी से गिरते पत्थरों को देखकर लोग अचानक सकते में आ गए थे।

शुरुआत में स्थानीय लोगों को जान-माल के भारी नुकसान की बड़ी आशंका सता रही थी। लेकिन राहत की बात यह है कि इस प्राकृतिक घटना से किसी भी प्रकार के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। सभी लोग सुरक्षित हैं और नदी का जलस्तर भी पूरी तरह से सामान्य बना हुआ है।

प्रशासन ने दी जानकारी, हर साल होती है घटना

चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस घटना से कोई नुकसान नहीं हुआ है। यह हर साल होने वाली एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिससे घबराने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है।

स्थानीय जानकारों के मुताबिक इन दिनों पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। चमोली जनपद के जंगलों में अचानक आग लगने के कारण स्थानीय तापमान में अत्यधिक वृद्धि दर्ज हुई है। इसी गर्मी की वजह से ऊंचे पहाड़ों पर मौजूद हिमखंड स्वाभाविक रूप से तेजी से पिघल रहे हैं।

उत्तराखंड में पहले भी आ चुकी हैं भयानक आपदाएं

उत्तराखंड का गढ़वाल क्षेत्र पहले भी कई गंभीर ग्लेशियर आपदाओं का गवाह रहा है। फरवरी 2021 में चमोली के रैणी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने से ऋषिगंगा नदी में भीषण बाढ़ आई थी। उस बड़ी आपदा में भारी तबाही हुई थी और कई महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाएं पूरी तरह तबाह हो गई थीं।

इससे पहले साल 2013 में केदारनाथ में आई भीषण आपदा ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। तब अत्यधिक बारिश और हिमखंडों के टूटने से केदारनाथ क्षेत्र में हजारों लोगों की जान गई थी। साल 2016 से 2018 के बीच भी ग्लेशियल लेक ओवरफ्लो होने से कई बार अचानक जल प्रवाह बढ़ा था।

वैज्ञानिकों के अनुसार बद्रीनाथ, माणा और कंचन गंगा जैसे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में गर्मियों के मौसम में छोटे हिमखंडों का टूटना बहुत सामान्य बात है। ये घटनाएं अक्सर बिना किसी बड़े नुकसान के समाप्त हो जाती हैं। प्रशासन फिलहाल पूरी स्थिति पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।

Author: Harish Rawat

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