Uttarakhand News: नैनीताल के चिड़ियाघर में वन्य जीवों को बचाने के लिए अब एक बड़ा वैज्ञानिक कदम उठाया जा रहा है। यहां मौजूद जानवरों का पहली बार डीएनए प्रोफाइल तैयार किया जाएगा। इस खास पहल से जीवों में होने वाली गंभीर आनुवांशिक बीमारियों और इनब्रीडिंग के खतरे को पूरी तरह से रोका जा सकेगा।
नैनीताल का गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान पर्यटकों को बहुत लुभाता है। वर्तमान में यहां देश के कई हिस्सों से लाए गए 29 प्रजातियों के 200 से अधिक जीव मौजूद हैं। लेकिन अभी तक चिड़ियाघर प्रबंधन के पास इन दुर्लभ जीवों का कोई भी पुख्ता आनुवांशिक डाटा उपलब्ध नहीं है।
इनब्रीडिंग से मंडरा रहा बड़ा खतरा
वैज्ञानिक डाटा न होने से एक ही परिवार के जीवों में इनब्रीडिंग की समस्या लगातार बढ़ रही है। इससे जानवरों में आनुवांशिक कमजोरी आ जाती है और कई बीमारियां पनपती हैं। अगर कोई एक जीव किसी खतरनाक संक्रामक बीमारी का शिकार होता है, तो पूरी प्रजाति के खत्म होने का बड़ा डर रहता है।
इस गंभीर संकट को देखते हुए डीएफओ आकाश गंगवार ने जीन सैंपलिंग की एक विशेष योजना बनाई है। इसके लिए सीसीएमबी हैदराबाद के विशेषज्ञों से संपर्क किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक डाटा न होने से दूसरे चिड़ियाघरों के साथ जानवरों की अदला-बदली करने में भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
रेड पांडा से शुरू होगी सैंपलिंग
इस महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत सबसे पहले चिड़ियाघर के मशहूर रेड पांडा से की जाएगी। साल 2014 में दार्जिलिंग जू से रेड पांडा का एक जोड़ा नैनीताल लाया गया था। अब इनका कुनबा बढ़कर छह हो गया है। इनमें तीन नर और तीन मादा रेड पांडा शामिल हैं जो यहां का मुख्य आकर्षण हैं।
पिछले बारह सालों में रेड पांडा का कुनबा तो बढ़ा है, लेकिन केवल एक ही परिवार का खून आगे बढ़ रहा है। इसलिए इनब्रीडिंग का खतरा सबसे ज्यादा इन्हीं पर मंडरा रहा है। पहले चरण में रेड पांडा की जीन सैंपलिंग होने के बाद इसे धीरे-धीरे अन्य सभी जीवों और पक्षियों पर भी लागू किया जाएगा।
Author: Harish Rawat


