Uttarakhand News: उत्तराखंड के सीमांत गांवों को पलायन से बचाने और उन्हें फिर से आबाद करने के लिए सरकार ने एक बड़ी पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘देश के प्रथम गांव’ विजन को साकार करते हुए, सरकार ने टिम्मरसैंण, माणा और जादूंग जैसे दूरस्थ गांवों को पर्यटन के मुख्य केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। इसके लिए 102.70 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जा रहा है।
नीती घाटी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की जा रही ‘एक्स्ट्रीम अल्ट्रा रन’ जैसे आयोजनों ने स्थानीय स्तर पर जबरदस्त प्रभाव डाला है। महज चार महीने के भीतर, स्थानीय होम स्टे में कमरों की संख्या 35 से बढ़कर 650 तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि इन क्षेत्रों में पर्यटकों की रुचि तेजी से बढ़ रही है और स्थानीय निवासियों के लिए स्वरोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।
टिम्मरसैंण, जादूंग और माणा का विकास
टिम्मरसैंण महादेव को एक प्रमुख टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने के लिए 26.85 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। अमरनाथ की तर्ज पर बर्फ के शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध इस स्थान पर सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वहीं, उत्तरकाशी के जनविहीन सीमांत गांव जादूंग को फिर से जीवंत करने के लिए पहले चरण में 14 भवनों के जीर्णोद्धार पर 19.59 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
चमोली जिले में स्थित देश के पहले गांव ‘माणा’ के लिए भी सरकार ने 56.16 करोड़ रुपये की बड़ी राशि स्वीकृत की है। इस बजट से माणा के बुनियादी ढांचे को आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा। पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार इन क्षेत्रों को स्थायी पर्यटन गंतव्य बनाना ही सरकार का मुख्य उद्देश्य है, जिससे सीमांत क्षेत्रों की आर्थिकी को नई मजबूती मिल सके।
इन योजनाओं से न केवल बुनियादी सुविधाएं बढ़ेंगी, बल्कि यह क्षेत्र साहसिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर भी मजबूती से उभरेंगे। सरकारी प्रयासों और जनभागीदारी का यह संगम न केवल स्थानीय पलायन को रोकेगा, बल्कि इन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध गांवों को आत्मनिर्भर भी बनाएगा।
Author: Harish Rawat

