Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय में नियमों की धज्जियां उड़ाने का बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक छात्र की मार्कशीट में जन्मतिथि बदलने के नाम पर 40 हजार रुपये की रिश्वत ली गई। इस गंभीर गड़बड़ी के उजागर होने के बाद वाराणसी कार्यालय के प्रभारी अपर सचिव दिनेश सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने उप सचिव साहब सिंह यादव समेत छह अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
कैलेंडर में जो तारीख ही नहीं थी, वह मार्कशीट पर दर्ज हो गई
पीड़ित अंकित कुमार गोरखपुर के मूल निवासी हैं और वर्तमान में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं। अंकित ने साल 2014 में नीना थापा इंटर कॉलेज से हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी। उनकी मार्कशीट में जन्मतिथि 29 फरवरी 1998 छप गई थी। साल 1998 लीप वर्ष नहीं था, इसलिए उस साल फरवरी में 29 तारीख होना असंभव था। इस तकनीकी और अस्वाभाविक त्रुटि को सुधरवाने के लिए छात्र ने बोर्ड कार्यालय में आवेदन दिया था।
एक दिन में हुआ खेल तो छात्र को हुआ बड़ी धांधली का शक
अंकित ने बोर्ड सचिव को भेजी शिकायत में वरिष्ठ सहायक राहुल चौरसिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप के मुताबिक राहुल ने छात्र से कहा कि यह काम सिर्फ प्रयागराज या दिल्ली मुख्यालय से ही हो सकता है, जिसमें 40 हजार रुपये का खर्च आएगा। जरूरी दस्तावेज की जल्दबाजी में छात्र ने लिपिक को मांगी गई रकम दे दी। कर्मचारी ने अगले ही दिन संशोधित मार्कशीट थमा दी। महज एक दिन में काम होने से छात्र को गड़बड़ी का शक हुआ।
नियमों को ताक पर रखकर अधिकारियों ने पार की अपनी हदें
बोर्ड के नियमों के अनुसार क्षेत्रीय कार्यालय किसी भी छात्र के पास होने के केवल तीन साल के भीतर ही रिकॉर्ड में बदलाव कर सकते हैं। यह मामला साल 2014 का है, जो करीब 12 साल पुराना हो चुका है। इस पर फैसला लेने का अधिकार सिर्फ प्रयागराज स्थित मुख्य सचिव के पास सुरक्षित था। इसके बावजूद वाराणसी के अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया। नोटिस पाने वालों में मनोज कुमार, राणा प्रताप सिंह और संजय जायसवाल शामिल हैं।


