Uttar Pradesh News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली और बाहुबली नेताओं के शस्त्र लाइसेंस मामले में राज्य सरकार को अंतिम मोहलत दी है। कोर्ट ने सरकार को पूरी रिपोर्ट सौंपने के लिए 29 मई तक का समय दिया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने गृह सचिव के शपथ पत्र पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। सरकार ने अदालत को बताया कि कुल 83 चिन्हित व्यक्तियों में से अब तक केवल 42 लोगों की जानकारी ही मिल सकी है।
हाई कोर्ट की सरकार को सख्त चेतावनी और नई समय सीमा
अदालत ने राज्य सरकार की एक सप्ताह अतिरिक्त समय मांगने की अर्जी को स्वीकार करते हुए साफ किया कि इसके बाद कोई मौका नहीं मिलेगा। कोर्ट ने आदेश दिया है कि अगली सुनवाई पर निरीक्षक स्तर से ऊपर का एक जिम्मेदार अधिकारी अदालत में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहेगा। इस अधिकारी को मामले के सभी तथ्यों की पूरी जानकारी होनी चाहिए ताकि वह आवश्यकता पड़ने पर कोर्ट की मदद कर सके। फिलहाल प्रशासन बाकी 41 संदिग्ध रसूखदारों के हथियारों का विवरण जुटा रहा है।
पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह और बृजभूषण सिंह के लाइसेंस रडार पर
यह पूरा मामला संत रविदास नगर भदोही के रहने वाले एक आभूषण व्यवसायी जयशंकर उर्फ बैरिस्टर की याचिका से जुड़ा है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान पूर्व मंत्री व वर्तमान विधायक रघुराज प्रताप सिंह और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह समेत 19 प्रमुख लोगों के शस्त्र लाइसेंसों पर विशेष रिपोर्ट मांगी थी। दरअसल, याचिकाकर्ता ने अपने शस्त्र लाइसेंस के आवेदन को चार साल तक लटकाए रखने और फिर खारिज किए जाने के बाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
उत्तर प्रदेश में हथियारों का खेल और सरकारी आंकड़े
संयुक्त सचिव गृह द्वारा दाखिल हलफनामे के मुताबिक उत्तर प्रदेश में इस समय कुल 10,08,953 शस्त्र लाइसेंस धारक मौजूद हैं। वर्तमान में विभिन्न श्रेणियों के तहत लगभग 23,407 नए आवेदन जिला प्रशासन के पास विचाराधीन हैं। इसके अलावा जिलाधिकारियों के फैसले के खिलाफ 1,738 अपीलें अलग-अलग कमिश्नर के समक्ष लंबित पड़ी हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य के 20,960 परिवारों में एक से अधिक हथियार हैं और 6,062 अपराधियों को लाइसेंस दिए गए हैं।

