Mumbai News: टाटा ग्रुप के दक्षिण मुंबई स्थित मुख्यालय ‘बॉम्बे हाउस’ में मंगलवार को एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में नए जमाने के बिजनेस प्रमुखों ने टाटा संस के छह सदस्यीय बोर्ड के सामने अपने प्रेजेंटेशन दिए। एअर इंडिया, टाटा डिजिटल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वाकांक्षी वेंचर्स अभी भारी घाटे से जूझ रहे हैं।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के नवनियुक्त चेयरमैन नोएल टाटा भी शामिल हुए। नोएल टाटा ने ही हाल के दिनों में समूह के कुछ चुनिंदा नए कारोबारों में हो रहे बड़े नुकसान को लेकर गहरी चिंता जताई थी। हालांकि, इस महत्वपूर्ण बैठक के भीतर क्या अहम फैसले लिए गए, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर सस्पेंस
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन जब बैठक खत्म होने के बाद बाहर निकले, तो उन्होंने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। सूत्रों के मुताबिक, टाटा संस बोर्ड की अगली अहम बैठक आगामी 12 जून को होने की पूरी संभावना है। माना जा रहा है कि उस बैठक में मौजूदा चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को बढ़ाने पर चर्चा होगी।
चेयरमैन चंद्रशेखरन और नोएल टाटा ने कुछ दिनों पहले भी मुलाकात की थी। नोएल टाटा वर्तमान में टाटा संस के बोर्ड में एक नामित निदेशक की भूमिका भी निभा रहे हैं। दोनों दिग्गजों के बीच हुई उस गुप्त मुलाकात में मुख्य रूप से समूह की घाटे में चल रही कंपनियों के प्रदर्शन में सुधार लाने पर चर्चा हुई थी।
टाटा ग्रुप के न्यू-एज बिजनेस को हुआ बंपर घाटा
विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में टाटा ग्रुप के गैर-सूचीबद्ध (Unlisted) बिजनेस को करीब 10,905 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ था। अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में यह घाटा और ज्यादा बढ़कर सीधे 29,000 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच सकता है, जो बेहद चिंताजनक है।
नोएल टाटा विशेष रूप से उन नए उद्यमों से हो रहे नुकसान को लेकर चिंतित हैं, जिन्हें एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में शुरू किया गया है। इनमें टाटा डिजिटल के सुपर ऐप और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। इसके साथ ही विमानन क्षेत्र की कंपनी एअर इंडिया का घाटा भी उनकी मुख्य चिंताओं में शामिल है।
टाटा संस के आईपीओ पर भी फंसा पेंच
नोएल टाटा फिलहाल टाटा संस को आईपीओ (IPO) के जरिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। वे इस फैसले को लेकर लगातार हिचकिचा रहे हैं। वर्तमान में टाटा संस एक कोर निवेश कंपनी है, जिसे आरबीआई ने देश की शीर्ष 15 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) की अपर लेयर सूची में शामिल किया है।
आरबीआई के कड़े नियमों के अनुसार, इन चुनिंदा बड़ी कंपनियों का शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना बेहद जरूरी है। इस बीच, टाटा परिवार की नई पीढ़ी को भी जिम्मेदारियां मिलने लगी हैं। नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा को पहले ही समूह से जुड़े कुछ प्रमुख ट्रस्ट और फाउंडेशन में आधिकारिक तौर पर शामिल किया जा चुका है।
Author: Sachin Kulkarni


