हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ‘अपनी मर्जी से शादी कर साथ रह सकते हैं बालिग’, पिता की दर्ज FIR रद

Prayagraj News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रेम विवाह करने वाले एक बालिग जोड़े के पक्ष में बेहद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि कानूनन बालिग लड़का-लड़की अपनी मर्जी से किसी के साथ भी विवाह कर जीवन बिता सकते हैं।

अदालत ने लड़की के पिता की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी (FIR) को पूरी तरह से रद कर दिया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने एसएसपी बदायूं को कड़ा निर्देश जारी करते हुए नवविवाहित जोड़े को तत्काल प्रभाव से चौबीसों घंटे सुरक्षा मुहैया कराने का एक महत्वपूर्ण आदेश भी दिया है।

पिता को मंजूर नहीं था रिश्ता, दर्ज करा दी थी एफआईआर

इस पूरे मामले के कानूनी तथ्य बदायूं जिले से जुड़े हुए हैं। यहां की रहने वाली शिवानी और दीपक ने बीते 11 अप्रैल 2026 को प्रयागराज स्थित एक आर्य समाज मंदिर में पूरी हिंदू रीति-रिवाज के साथ विवाह कर लिया था। दोनों ने अपनी शादी का आधिकारिक मैरिज सर्टिफिकेट भी अदालत के समक्ष पेश किया।

हालांकि, शिवानी के पिता रणवीर को यह प्रेम विवाह किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं था। उन्होंने शादी से एक दिन पहले, यानी 10 अप्रैल 2026 को ही बदायूं के थाना मूसा झाग में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) और 87 के तहत लड़के के खिलाफ एक आपराधिक मुकदमा दर्ज करा दिया था।

पिता के घर जाने से शिवानी ने कोर्ट में किया साफ इन्कार

इसके बाद शिवानी ने जिला पुलिस कप्तान (SSP) के सामने शिकायत दर्ज कराई कि उसके पिता और कुछ अन्य लोग उन दोनों को जान से मारने की लगातार धमकियां दे रहे हैं। अंत में, सुरक्षा न मिलने पर दोनों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और एफआईआर रद करने की गुहार लगाई।

गत पांच मई को यह प्रेमी जोड़ा हाई कोर्ट की खंडपीठ के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश हुआ। माननीय न्यायमूर्तियों ने अदालत कक्ष में शिवानी से सीधे बातचीत कर उसका पक्ष जाना। शिवानी ने कोर्ट को बताया कि उसकी उम्र 19 साल है और उसने अपनी मर्जी से दीपक से शादी की है।

बालिगों के निजी जीवन में दखल देने का अधिकार किसी को नहीं

लड़की ने अदालत के सामने दृढ़ता से कहा कि वह अब सिर्फ अपने पति दीपक के साथ ही अपनी आगे की जिंदगी बिताना चाहती है, अपने पिता के घर वापस बिल्कुल नहीं जाना चाहती। शिवानी का यह दोटूक बयान सुनने के बाद हाई कोर्ट ने इस मामले में एक बेहद गंभीर और कड़ा रुख अपनाया।

खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब दोनों नागरिक कानूनन बालिग हैं, तो भारत के संविधान और कानून के अनुसार वे अपनी पसंद से शादी करने के हकदार हैं। इस मामले में लड़की के पिता, परिवार के अन्य सदस्यों या स्थानीय पुलिस को उनके निजी जीवन में दखल देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

जनरल डायरी में लाल स्याही से दर्ज होगा केस बंदी का आदेश

हाई कोर्ट ने माना कि पिता ने दुर्भावना और गलत नीयत के तहत यह प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अदालत ने संबंधित सीजेएम (CJM) को आदेश दिया है कि वे पुलिस थाने के रोजनामचे (General Diary) में लाल स्याही से यह विशेष एंट्री दर्ज कराएं कि यह आपराधिक केस अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।

अदालत ने एसएसपी बदायूं को चेतावनी भरे लहजे में हिदायत दी है कि शिवानी और दीपक की जान-माल की हिफाजत सुनिश्चित की जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि यदि भविष्य में इस जोड़े को लड़की के पिता या उनके सहयोगियों से कोई भी नुकसान पहुंचता है, तो एसएसपी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के प्रति जवाबदेह होंगे।

Author: Ajay Mishra

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