Uttar Pradesh News: लखनऊ जिला पंचायत में चल रही आपसी खींचतान के कारण करोड़ों का बजट खजाने में ही फंसा रह गया। साल 2021 में शपथ लेने वाले ग्राम प्रधानों का पांच साल का कार्यकाल अब पूरा हो चुका है। इसके बावजूद भ्रष्टाचार के आरोपों और सियासी ड्रामे के चलते विकास कार्यों पर एक पाई भी खर्च नहीं हो सकी।
अध्यक्ष और सदस्यों के बीच जारी विवाद की वजह से वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 का 50 करोड़ रुपये से अधिक का फंड बैंक खातों में जमा पड़ा है। जिला पंचायत के दायरे में आने वाले ग्रामीण इलाकों के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। अब प्रशासक राज लागू होने के बाद ही सुधार की उम्मीद है।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और अदालती कार्यवाही में उलझा कामकाज
जिला पंचायत के कुल 25 सदस्य ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए प्रस्ताव तैयार करते हैं। इन प्रस्तावों को बोर्ड बैठक की मंजूरी मिलने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होती है। लेकिन अध्यक्ष आरती रावत पर लगे वित्तीय अनियमितताओं के संगीन आरोपों ने पिछले दो साल से पूरे प्रशासनिक कामकाज को ठप कर दिया है।
जिला पंचायत सदस्य नीतू की शिकायत पर तत्कालीन जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने प्रारंभिक जांच की थी। इस रिपोर्ट के आधार पर शासन ने अध्यक्ष आरती रावत को निलंबित कर दिया था। हालांकि हाई कोर्ट ने तकनीकी खामियों के चलते निलंबन पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जिससे कानूनी पेचदगियां और अधिक बढ़ गईं।
इसके बाद मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब ने मामले की विस्तृत जांच पूरी की। शासन ने इस जांच रिपोर्ट के आधार पर जून 2025 में उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 29 के तहत आरती रावत को पद से हटाने का कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
प्रशासक बनने से बढ़ेगी ग्राम प्रधानों की ताकत और बदलेगा नियम
अब सरकार ने विकास कार्यों को रफ्तार देने के लिए ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त करने का बड़ा फैसला लिया है। इस नए आदेश के लागू होने के बाद अब प्रशासक बने प्रधानों को विकास कार्यों का कोई भी नया प्रस्ताव पास कराने के लिए ग्राम पंचायत की औपचारिक अनुमति नहीं लेनी होगी।
लखनऊ जनपद में इस समय कुल 491 ग्राम पंचायतें मौजूद हैं। नियमों के मुताबिक पहले हर प्रस्ताव को ग्राम पंचायत की बैठक में पास कराना अनिवार्य होता था। लेकिन अब प्रशासक सीधे तौर पर फाइलों को आगे बढ़ा सकेंगे, जिससे विकास कार्यों की राह में आने वाली कानूनी अड़चनें पूरी तरह दूर हो जाएंगी।
राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने सरकार के इस कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि इस फैसले से प्रधानों की प्रशासनिक शक्ति दोगुनी हो जाएगी। वहीं दूसरी तरफ जिले में मई तक प्रस्तावित पंचायत चुनाव अब राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाएंगे।
Author: Ajay Mishra

