Ghaziabad News: प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के सख्त निर्देशों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। सार्वजनिक परिवहन या कार-पूलिंग के बजाय, जिले के अधिकारी और 50 से अधिक चिकित्सक नोएडा व दिल्ली से रोज निजी वाहनों से अस्पताल आ-जा रहे हैं, जिससे सरकारी आदेश पूरी तरह प्रभावहीन नजर आ रहे हैं।
नियमानुसार, चिकित्सा अधिकारियों का आवास अस्पताल से पांच किलोमीटर के दायरे में होना अनिवार्य है। इसके बावजूद, अधिकांश डॉक्टर दूरदराज के शहरों में रहते हैं और निजी वाहनों से ड्यूटी पर आते हैं। यह स्थिति न केवल सरकारी आदेशों का उल्लंघन है, बल्कि मरीजों के लिए भी परेशानी का सबब बनी हुई है, क्योंकि कई डॉक्टर मरीजों को बीच में ही छोड़कर वापस अपने शहर लौट जाते हैं।
सीएमओ का बंगला वीरान, नियमों की अनदेखी
प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि जिला एमएमजी अस्पताल में स्थित सीएमओ का आधिकारिक बंगला पिछले डेढ़ साल से खाली पड़ा है। हालांकि, इसके रखरखाव और बिजली के बिलों पर सरकारी बजट खर्च हो रहा है। नियम है कि सीएमओ जिले से बाहर नहीं जा सकते, फिर भी वर्तमान कार्यवाहक सीएमओ डॉ. अमित विक्रम रोज निजी वाहन से ही दफ्तर पहुंच रहे हैं।
अकेले सीएमओ ही नहीं, बल्कि एसीएमओ, डिप्टी सीएमओ और अन्य स्टाफ भी इन्हीं नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अभिषेक त्रिपाठी सहित कई अन्य वरिष्ठ डॉक्टर भी नोएडा और दिल्ली से निजी गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। अस्पताल परिसर में तैनात डॉक्टरों में से गिने-चुने ही मुख्यालय पर निवास कर रहे हैं।
प्रशासन की ओर से 15 मई को जारी किए गए सर्कुलर में स्पष्ट निर्देश थे कि आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए राजकीय बैठकें वर्चुअली हों और अधिकारी निजी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करें। लेकिन जमीनी हकीकत इन निर्देशों के उलट है। खुद सीएमओ ने निजी वाहन के इस्तेमाल की पुष्टि की है, जिससे यह साफ है कि सरकारी तंत्र के भीतर अनुशासन का भारी अभाव है।
Author: Rajesh Kumar


