Lucknow News: उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला लिया है। अब बिल्डर घर खरीदारों से मिलने वाली धनराशि को किसी अन्य परियोजना में निवेश नहीं कर सकेंगे और न ही उसका निजी उपयोग कर पाएंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अटकी हुई परियोजनाओं को समय पर पूरा करना है।
यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने इस नई व्यवस्था के तहत बिल्डरों के लिए तीन बैंक खाते रखना अनिवार्य कर दिया है। प्राधिकरण ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर इस वित्तीय अनुशासन को कड़ाई से लागू करने की योजना बनाई है। यह नियम उन बिल्डरों पर लगाम लगाने के लिए है जो खरीदारों के पैसों का दुरुपयोग करते हैं।
नए दिशानिर्देशों के अनुसार, घर खरीदारों से प्राप्त कुल राशि का कम से कम 70 फीसदी हिस्सा हर दिन स्वचालित रूप से एक ‘पृथक खाते’ (Separate Account) में ट्रांसफर करना होगा। इस खाते की धनराशि का उपयोग केवल उस विशिष्ट परियोजना की जमीन और निर्माण कार्य पर ही किया जा सकेगा। किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए इसका उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।
ब्याज दरों की हेराफेरी पर भी रोक
बिल्डरों द्वारा कर्ज के नाम पर की जाने वाली वित्तीय गड़बड़ियों को रोकने के लिए भी रेरा ने सख्त कदम उठाए हैं। अक्सर बिल्डर एनबीएफसी (NBFC) से लिए गए कर्ज पर अत्यधिक ब्याज दरें दिखाकर परियोजना के फंड को डायवर्ट करते थे। अब रेरा ने कर्ज पर स्वीकार्य ब्याज दरों की एक अधिकतम सीमा निर्धारित कर दी है, जिससे हेराफेरी की गुंजाइश खत्म हो गई है।
यह नई बैंकिंग व्यवस्था और परियोजना खाता दिशानिर्देश 11 मई से प्रभावी कर दिए गए हैं। यूपी रेरा की यह पहल नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों में उन हजारों खरीदारों के लिए बड़ी राहत है, जो बिल्डरों द्वारा परियोजना लटकाए जाने की वजह से सालों से अपने घर के सपने के पूरा होने का इंतजार कर रहे थे।
रेरा ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘गारंटीशुदा रिटर्न’ (Assured Return) जैसी योजनाओं के नाम पर खरीदारों के धन का उपयोग करना अब गैर-कानूनी होगा। इस कदम से न केवल वित्तीय पारदर्शिता आएगी, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा। प्राधिकरण ने बैंकों को भी इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
Author: Amit Yadav


