हिमाचल प्रदेश में IFS कैडर घटाने के प्रस्ताव पर केंद्र सख्त, राज्य सरकार से मांगी चार दशक पुरानी पूरी रिपोर्ट

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Himachal News: हिमाचल प्रदेश में भारतीय वन सेवा यानी आईएफएस कैडर में कटौती करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने इस संबंध में राज्य सरकार को आधिकारिक पत्र भेजकर अतिरिक्त जानकारी और स्पष्टीकरण मांगा है।

केंद्र सरकार ने राज्य प्रशासन से मुख्य रूप से चार सवाल पूछे हैं। पत्र में पूछा गया है कि चार दशक पहले हिमाचल प्रदेश में आइएफएस कैडर की संख्या कितनी थी। इस कैडर स्ट्रेंथ में पिछली बार कब बढ़ोतरी की गई थी और उस समय क्या विशेष तर्क दिया गया था।

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कैडर घटाने पर केंद्र ने मांगे स्पष्ट तर्क

केंद्र ने यह भी पूछा है कि यदि अब कैडर को कम कर दिया जाता है, तो भविष्य में होने वाली कमी को दूर करने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। राज्य सरकार ने अपनी तरफ से इन सभी बिंदुओं का विस्तृत जवाब तैयार करके केंद्र सरकार को भेज दिया है।

अब इस पूरे मामले में केंद्र सरकार से अंतिम जवाब आने के बाद ही हिमाचल सरकार अगला कदम उठाएगी। हिमाचल प्रदेश में फिलहाल आइएफएस की कुल स्वीकृत कैडर स्ट्रेंथ 114 है। लेकिन मौजूदा समय में राज्य के भीतर केवल 87 पदों पर ही अधिकारी तैनात हैं।

अधिकारियों की कमी और प्रतिनियुक्ति का गणित

इन 87 कार्यरत अधिकारियों में से भी 15 वरिष्ठ अधिकारी फिलहाल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त चार अन्य अफसर राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में तैनात हैं। पिछले कुछ सालों से एचएफएस से पदोन्नत होकर कोई भी नया अधिकारी आइएफएस नहीं बना है।

राज्य सरकार ने इस वर्तमान कैडर संख्या को घटाकर 83 करने का अंतिम प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा है। हिमाचल प्रदेश सरकार अपने इस नए प्रशासनिक सुधार के तहत वन सेवा विभाग से कुल 31 पदों या अधिकारियों की संख्या को कम करना चाहती है।

नई व्यवस्था के लिए सरकार ने दिए तर्क

राज्य सरकार का तर्क है कि वन विभाग मुख्यालय से लेकर फील्ड तक अधिकारियों की संख्या को तर्कसंगत बनाया जाएगा। योजना के तहत हर जिले में केवल एक ही डीएफओ तैनात होगा। बड़े जिलों या वन अभ्यारण्य वाले क्षेत्रों में अधिकतम दो डीएफओ नियुक्त किए जा सकते हैं।

सरकार ने इसके पीछे तर्क दिया है कि जब जिला उपायुक्त यानी डीसी पूरे जिले की कानून व्यवस्था देख सकते हैं, तो डीएफओ ऐसा क्यों नहीं कर सकते। सरकार का पूरा ध्यान अब बड़ी अफसरशाही के बजाय जमीनी स्तर पर वन रक्षकों और फील्ड स्टाफ की संख्या बढ़ाने पर है।

चार सीनियर अफसर दूसरे विभागों में तैनात

राज्य सरकार ने वर्तमान में चार वरिष्ठ आईएफएस अधिकारियों को उनके मूल वन विभाग के बजाय अन्य महत्वपूर्ण विभागों में तैनात किया है। इनमें सुशील कुमार सिंगला को सचिव पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और राजेश शर्मा को राज्य परियोजना निदेशक एसएसए बनाया गया है।

इसके अलावा नीरज कुमार वर्तमान में निदेशक शहरी विकास विभाग के पद पर कार्यरत हैं। वहीं पुष्पेंद्र राणा को निदेशक पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से प्रशासनिक कार्यों में अधिक कार्यकुशलता आएगी।

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