Lucknow News: लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में दिल के मरीजों को अब इलाज के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। संस्थान में सितंबर के पहले सप्ताह तक एक और एडवांस कैथ लैब स्थापित कर दी जाएगी। इस नई लैब में थ्रीडी ईको और ट्रेडमिल टेस्ट (टीएमटी) समेत कई आधुनिक जांच उपकरण लगाए जा रहे हैं।
एंजियोग्राफी और पेसमेकर ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर सर्जरी होंगी आसान
लोहिया संस्थान में वर्तमान में तीन कैथ लैब का सफल संचालन हो रहा है। मरीजों के बढ़ते दबाव को देखते हुए करीब 12 करोड़ रुपये की भारी लागत से चौथी लैब का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इसे आगामी दो महीनों के भीतर पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह ने बताया कि यह नई कैथ लैब अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगी। यहां एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर ट्रांसप्लांट जैसी इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी प्रक्रियाएं अधिक सुरक्षित और सटीक तरीके से की जा सकेंगी। इससे अस्पताल में गंभीर मरीजों की लंबी वेटिंग लिस्ट की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
थ्रीडी ईको मशीन से जन्मजात हृदय विकारों की होगी सटीक जांच
हृदय रोग विभाग को मजबूत बनाने के लिए यहां एक आधुनिक थ्रीडी ईको मशीन भी लगाई जा रही है। इस एडवांस तकनीक से दिल की संरचना का त्रि-आयामी (3डी) चित्र मिलेगा। इससे डॉक्टरों को वाल्व संबंधी बीमारियों और बच्चों में जन्मजात हृदय विकारों जैसी जटिल समस्याओं का सटीक आकलन करने में बड़ी मदद मिलेगी।
कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. भुवन चंद्र तिवारी के अनुसार, ओपीडी में रोजाना 250 से 300 हृदय रोगी इलाज के लिए आते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी में भी हर दिन हार्ट अटैक के कई गंभीर केस पहुंचते हैं। अस्पताल में पहले से दो टीएमटी मशीनें एक्टिव हैं और अब एक और नई मशीन इंस्टॉल की जाएगी।
उत्तर प्रदेश में कोरोना के बाद युवाओं में 45 प्रतिशत बढ़े हार्ट अटैक के मामले
प्रो. तिवारी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि कोरोनाकाल के बाद कोरोनरी आर्टरी डिजीज के मामलों में करीब 30 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन नए मरीजों में युवाओं की संख्या लगभग 45 प्रतिशत के आसपास पहुंच चुकी है।
उत्तर प्रदेश में हर साल करीब ढाई लाख से अधिक हार्ट अटैक के मामले सामने आ रहे हैं। इस समय राज्य में सबसे ज्यादा दबाव लोहिया संस्थान, लारी कार्डियोलॉजी और एसजीपीजीआई पर है। नई लैब शुरू होने से मरीजों को सस्ते में वर्ल्ड क्लास इलाज मिलेगा और उन्हें निजी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

