Agra News: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिकी टैरिफ और पिछले चार महीनों से जारी पश्चिम एशिया संकट ने आगरा के जूता निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सर्दियों का बिजनेस पूरी तरह चौपट होने के बाद अब आगामी गर्मियों के सीजन के लिए नए ऑर्डर मिलने में भी भारी दिक्कत आ रही है।
आगरा के चमड़ा जूता उद्योग की देश के कुल एक्सपोर्ट में 28% हिस्सेदारी
ताजनगरी आगरा से चमड़े के जूतों का सालाना लगभग 4500 करोड़ रुपये का भारी निर्यात किया जाता है। देश के कुल जूता निर्यात में अकेले आगरा की करीब 28 प्रतिशत की बड़ी भागीदारी है। यहाँ लगभग 150 से अधिक बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स सीधे तौर पर जूता एक्सपोर्ट बिजनेस से जुड़ी हुई हैं।
इस साल 28 फरवरी से पश्चिम एशिया में शुरू हुए भीषण युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में कमर्शियल जहाजों के आवागमन पर लगी रोक ने इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स को पूरी तरह प्रभावित किया है। इस भू-राजनीतिक तनाव की वजह से ग्लोबल मार्केट में पेट्रोलियम पदार्थों और ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
ईंधन की महंगाई से यूरोप के बाजारों में जूतों की डिमांड 40% तक घटी
ईंधन संकट के कारण पूरे यूरोप में गैस, बिजली और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के दाम काफी बढ़ गए हैं। इसके चलते वहां के आम उपभोक्ताओं के बजट पर सीधा असर पड़ा है और कपड़े व जूतों की खरीदारी बहुत कम हो गई है। इसका सबसे बड़ा और सीधा नुकसान आगरा के जूता निर्यातकों को उठाना पड़ा है।
जूता निर्यातकों की प्रमुख संस्था एफमेक के सीनियर पदाधिकारी राजेश सहगल के अनुसार, इस बार यूरोप में विंटर शूज का एक्सपोर्ट 30 से 40 प्रतिशत तक कम रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से ही हालात लगातार चिंताजनक बने हुए हैं, जिसके चलते निर्यातक अब अपने कारखानों में प्रोडक्शन लगातार घटा रहे हैं।
इटली के गार्डा फेयर में बायर्स की संख्या रही बेहद कम
आगरा में बनने वाले कुल एक्सपोर्ट क्वालिटी जूतों की लगभग 70 प्रतिशत खपत अकेले यूरोपीय देशों के बाजारों में होती थी। अमेरिका में भी भारी टैरिफ के कारण मार्केट काफी प्रभावित हुआ था, हालांकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अब वहां स्थिति में कुछ सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
जूता कारोबार के लिए दुनिया भर में मशहूर ‘गार्डा फेयर’ का आयोजन इस बार 13 से 16 जून तक इटली में किया गया था। इस इंटरनेशनल फेयर में मंदी के चलते विदेशी बायर्स की संख्या बेहद कम रही। खरीदारों की ओर से कोई खास रिस्पॉन्स न मिलने के कारण आगामी सीजन के लिए नई इन्क्वायरी भी न के बराबर रही हैं।

