Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में इस बार वित्तायोग से पंचायती राज संस्थाओं को मिलने वाले विकास बजट में भारी बढ़ोतरी होने जा रही है। राज्य की ग्राम पंचायतों को 16वें वित्त आयोग से पहली किस्त के रूप में 240.50 करोड़ रुपये का भारी-भरकम फंड मिलेगा।
वित्त विभाग के अनुसार अभी यह धनराशि केंद्र सरकार से आधिकारिक रूप से प्राप्त नहीं हुई है। पहले जहां कुल अनुदान का 70 प्रतिशत हिस्सा ग्राम पंचायतों को दिया जाता था, वहीं अब प्रदेश सरकार ने इसे बढ़ाकर सीधा 80 प्रतिशत करने का बड़ा फैसला किया है।
हिमाचल की 3,758 ग्राम पंचायतों को मिलेगा अधिक वित्तीय लाभ
सरकार के इस बड़े फैसले से हिमाचल प्रदेश की सभी 3,758 ग्राम पंचायतों के पास बुनियादी विकास कार्यों के लिए पहले से बहुत अधिक धन उपलब्ध होगा। इस बजट अनुदान का पूरा वितरण पंचायतों की स्थानीय जनसंख्या और भौगोलिक क्षेत्रफल को मुख्य आधार बनाकर किया जाएगा।
इसके साथ ही 15वें वित्त आयोग की तुलना में इस बार मिलने वाली पहली किस्त में करीब 103 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह अतिरिक्त वित्तीय पैकेज पंचायतों को अपने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय विकास योजनाओं को तेज गति देने में मदद करेगा।
जिला परिषदों और पंचायत समितियों के हिस्से में बड़ा बदलाव
राज्य सरकार ने जिला परिषदों और पंचायत समितियों के वित्तीय हिस्से में भी आवश्यक बदलाव किए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य निचले स्तर पर ग्राम पंचायतों को और अधिक मजबूत बनाना तथा उन्हें ज्यादा वित्तीय अधिकार सौंपना है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर मजबूती मिल सके।
हाल ही में पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद राज्य की सभी पंचायतों में नए जनप्रतिनिधि अपना कार्यभार संभाल चुके हैं। ऐसे समय में यह अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिलने से गांवों में विकास कार्यों की रफ्तार दोगुनी होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
ग्रामीण विकास के लिए दो अलग श्रेणियों में मिलेगी राशि
16वें वित्त आयोग से मिलने वाला यह पूरा फंड दो मुख्य श्रेणियों में जारी किया जाएगा। पहली श्रेणी टाइड ग्रांट होगी, जिसका उपयोग केवल निर्धारित बुनियादी कार्यों जैसे पेयजल व्यवस्था मजबूत करने, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर ही किया जा सकेगा।
दूसरी श्रेणी अनटाइड ग्रांट की होगी, जिसे सभी ग्राम पंचायतें अपनी स्थानीय प्राथमिकताओं और जरूरतों के अनुसार खुलकर खर्च कर सकेंगी। इससे गांवों में सडक़ों की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट लगाने और सामुदायिक भवनों के रखरखाव के कार्यों में अभूतपूर्व तेजी देखने को मिलेगी।

