New Delhi News: भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में अगर आप साल 2026 या भविष्य में अपने लिए नई गाड़ी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आपने कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को जरूर नोटिस किया होगा। पिछले कुछ समय से लगभग सभी बड़ी कंपनियों की कारों के दाम हर महीने तेजी से बढ़ रहे हैं।
कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और वेस्ट एशिया का इंटरनेशनल टेंशन
ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में गाड़ियों के रेट्स बढ़ने का सबसे बड़ा कारण इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे माल की बढ़ती लागत है। कार मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले स्टील, एल्युमिनियम और कीमती मेटल्स काफी महंगे हो चुके हैं। इसके अलावा वेस्ट एशिया में चल रहे भारी तनाव के कारण ग्लोबल लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी पहले से दोगुना हो गया है।
यूएस डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई कमजोरी ने ऑटो कंपनियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विदेशों से पार्ट्स इंपोर्ट करना काफी खर्चीला साबित हो रहा है। इस लगातार बढ़ते हुए इकोनॉमिक प्रेशर के कारण ही ऑटोमोबाइल कंपनियों को मजबूर होकर हर महीने गाड़ियों की एक्स-शोरूम कीमतों में भारी इजाफा करना पड़ रहा है।
फाइनेंस और आसान ईएमआई ऑप्शन से बढ़ी कारों की डिमांड
भारत में आज के समय में गाड़ी खरीदना पहले के मुकाबले बेहद आसान हो गया है। बैंकों और फाइनेंस कंपनियों द्वारा दिए जा रहे आसान ईएमआई ऑप्शंस के कारण हर महीने नई कारों की डिमांड रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच रही है। आजकल ग्राहक गाड़ी की कुल कीमत देखने के बजाय अपने मंथली बजट पर ज्यादा फोकस करते हैं।
जब कार के बेस मॉडल और टॉप मॉडल की मंथली ईएमआई में सिर्फ दो या तीन हजार रुपये का मामूली अंतर दिखता है, तो मिडिल क्लास खरीदार भी आसानी से प्रीमियम कार चुन लेता है। ग्राहकों की इसी लगातार बढ़ती भारी डिमांड और प्रीमियम फीचर्स की चाहत का फायदा उठाकर कंपनियां भी हर महीने खुलकर दाम बढ़ा रही हैं।

