Shimla News: हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने करुणामूलक आधार पर सरकारी नौकरी की आस छोड़ चुके परिवारों के लिए बड़ी राहत दी है। राज्य सरकार ने पहले से खारिज हो चुके आवेदनों की दोबारा से जांच करने का एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है।
वित्त विभाग की ओर से इस संबंध में एक जरूरी आधिकारिक कार्यालय ज्ञापन (ऑफिस मेमोरेन्डम) जारी किया गया है। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक सभी पात्र आश्रितों को 31 दिसंबर 2026 तक संबंधित विभाग में अपना नया आवेदन जमा करना होगा। इसके बाद आवेदन स्वीकार नहीं होंगे।
वर्तमान आर्थिक स्थिति के आधार पर दोबारा होगा मूल्यांकन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि करुणामूलक आधार पर नियुक्ति पाना किसी का कानूनी अधिकार नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले कर्मचारियों के गरीब परिवारों को संकट से उबारना है। कई आश्रितों ने गुहार लगाई थी कि आवेदन खारिज होने के बाद भी उनकी माली हालत नहीं सुधरी है।
इसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने मानवता के आधार पर यह फैसला लिया है। अब इन मामलों की नए सिरे से वर्तमान आर्थिक स्थिति देखकर जांच होगी। नया आवेदन मिलने के बाद संबंधित विभाग को एक महीने के भीतर अपनी जांच पूरी कर अंतिम फैसला लेना होगा।
केवल आर्थिक आधार पर खारिज हुए मामलों को ही मिलेगा लाभ
वित्त विभाग ने साफ किया है कि दोबारा जांच का लाभ सिर्फ उन्हीं मामलों को मिलेगा जो पहले केवल कम आर्थिक तंगी के कारण रिजेक्ट हुए थे। किसी अन्य तकनीकी वजह से खारिज किए गए आवेदनों को दोबारा बिल्कुल नहीं खोला जाएगा। यह सरकार की एक विशेष व्यवस्था है।
भर्ती के दौरान संबंधित पद के तय नियमों (आर एंड पी रूल्स) के तहत ही कैंडिडेट की योग्यता जांची जाएगी। नियमों में किसी प्रकार की अतिरिक्त छूट नहीं मिलेगी। मामला पूरी तरह सही पाए जाने पर नियुक्ति पत्र (अपॉइंटमेंट लेटर) जारी करने से पहले मुख्यमंत्री की मंजूरी जरूरी होगी।
इस विशेष नियम के तहत 31 दिसंबर 2026 तक सीधी भर्ती के तय पांच फीसदी कोटे की सीमा लागू नहीं होगी। क्लास-थ्री पदों पर नियुक्तियां कार्मिक विभाग के माध्यम से होंगी। वहीं क्लास-फोर और मल्टी टास्क वर्कर (एमटीडब्ल्यू) के पद कॉमन एमटीडब्ल्यू पॉलिसी के तहत ही भरे जाएंगे।

