IGIMS में आयुष्मान भारत योजना में महाघोटाला, मरीजों का इलाज किए बिना ही निकाल लिए करोड़ों रुपये

Bihar News: पटना के प्रतिष्ठित आईजीआईएमएस अस्पताल में एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां गरीबों को पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा देने वाली प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना में हुए महाघोटाले की उच्च स्तरीय जांच बुधवार से शुरू हो गई है।

अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों ने बंद कमरे में कई घंटों तक मैराथन बैठक की। इस बैठक में फैसला लिया गया कि साल 2023 में जब से संस्थान के सी-डैक सिस्टम से काम शुरू हुआ है, तब से लेकर अब तक के सभी रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच की जाएगी।

फिलहाल जांच का दायरा मुख्य रूप से उन मरीजों तक सीमित रखा गया है, जिनकी श्रेणी आयुष्मान से कैश या फिर नकद से आयुष्मान में बदली गई थी। संदेह के घेरे में आए ऐसे सभी मरीजों के खातों और इलाज का पूरा ऑडिट कराने का कड़ा निर्णय लिया गया है।

इस महाघोटाले में आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पताल के स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों से भी कड़ी पूछताछ की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, यह हेराफेरी करोड़ों रुपये की हो सकती है। इसे देखते हुए अधिकारी हर एक ट्रांजैक्शन की परतों को गहराई से खोलने में जुट गए हैं।

कार्ड लेकर फर्जी इलाज दिखाने का हुआ भंडाफोड़

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब मुजफ्फरपुर के गायघाट निवासी मनोज झा ने आईजीआईएमएस प्रबंधन से एक लिखित शिकायत की। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने उनसे उनका आयुष्मान कार्ड मांगा था और इसके बदले में उन्हें चालीस हजार रुपये देने का लालच दिया था।

झा ने आश्वासन पर अपना कार्ड दे दिया, लेकिन उन्हें कोई पैसा नहीं मिला। लिखित शिकायत के बाद जब अस्पताल प्रशासन ने आंतरिक जांच की, तो पता चला कि मनोज झा का कोई इलाज ही नहीं हुआ था, लेकिन उनके कार्ड से पैसे की पूरी निकासी कर ली गई थी।

धोखाधड़ी सामने आते ही आईजीआईएमएस प्रबंधन ने शास्त्रीनगर थाने में एक नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस कार्रवाई के डर से आउटसोर्सिंग एजेंसी मेहता डाटा मैट्रिक्स ने आनन-फानन में पैंतालीस लाख रुपये आईजीआईएमएस के खाते में जमा करा दिए। स्वास्थ्य विभाग ने इस पर 48 घंटे में जवाब मांगा है।

विभागीय निर्देश पर आईजीआईएमएस प्रशासन ने तुरंत छह सदस्यीय एक विशेष जांच कमेटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी के अधिकारियों ने मेन ओपीडी भवन स्थित आयुष्मान कार्यालय के कमरा नंबर-22 का औचक निरीक्षण किया और वहां मौजूद कंप्यूटरों को अपने कब्जे में ले लिया।

कंप्यूटर से डिलीट डेटा रिकवर करने में जुटे इंजीनियर

जांच के दौरान आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मचारियों के कंप्यूटर सिस्टम को पूरी तरह खंगाला गया और कई सुरक्षित डिजिटल डेटा जब्त किए गए। आशंका है कि पकड़े जाने के डर से बहुत से महत्वपूर्ण डेटा डिलीट कर दिए गए हैं, जिन्हें अब रिकवर करने का प्रयास किया जा रहा है।

इस तकनीकी काम के लिए सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की एक विशेष टीम को भी काम पर लगाया गया है। मुख्य प्रशासनिक अधिकारी प्रफुल्ल रंजन ने प्राथमिकी में दर्ज कराया है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत कर बेईमानी से सरकारी फंड का भारी दुरुपयोग किया है।

अस्पताल के उप निदेशक डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने बताया कि यह अनियमितता तकनीकी खामी का फायदा उठाकर की गई है। इसलिए तकनीकी जांच पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। साल 2023 से अब तक के सभी संदेहास्पद मरीजों का ऑडिट होगा और कोई भी दोषी बच नहीं पाएगा।

Author: Amit Yadav

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