हिमाचल के सरकारी स्कूलों में भारी बवाल! नाम बड़े और दर्शन छोटे; सीबीएसई के नाम पर बच्चों का भविष्य दांव पर

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों को अपग्रेड कर सीबीएसई पैटर्न पर लाने के राज्य सरकार के दावों की जमीनी हकीकत अब खुलकर सामने आ रही है। स्कूलों में बुनियादी संसाधनों और शिक्षकों की भारी कमी का सीधा असर अब बच्चों की पढ़ाई पर दिखने लगा है।

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दाखिले में बनाया था रिकॉर्ड, अब नाम कटवा रहे अभिभावक

प्रदेश के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जंजैहली में सरकार के नए फैसले के बाद रिकॉर्ड संख्या में बच्चों ने दाखिला लिया था। जंजैहली पूरे प्रदेश का दूसरा ऐसा स्कूल बना था, जहां सीबीएसई बोर्ड लागू होने के बाद सबसे ज्यादा करीब 596 छात्र-छात्राओं ने अपना एडमिशन करवाया था।

जून का महीना शुरू होने के बावजूद इस मॉडल स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि स्कूल को सीबीएसई घोषित करने के बाद भी बच्चों को अभी तक पुराने एचपी बोर्ड के पैटर्न और किताबों से ही पढ़ाया जा रहा है।

इस लचर व्यवस्था और पढ़ाई के खराब स्तर से पूरी तरह तंग आकर अब तक 19 बच्चों के अभिभावकों ने स्कूल से अपने बच्चों के नाम कटवा दिए हैं। इन सभी बच्चों का दाखिला अब दूसरे निजी या सरकारी स्कूलों में करवा दिया गया है, जिससे स्कूल प्रशासन में हड़कंप है।

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ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं बच्चों के माता-पिता

स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता का साफ कहना है कि सरकार ने बड़े-बड़े वादे करके स्कूल को सीबीएसई तो बना दिया, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। अभिभावक सीमा ठाकुर के अनुसार, वे खुद को पूरी तरह ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और बच्चों का भविष्य बर्बाद होते नहीं देख सकते।

स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के अध्यक्ष देवी सिंह ठाकुर ने बताया कि अप्रैल महीने से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने आज तक यहां नए अध्यापकों की नियुक्ति नहीं की है। यदि रिक्त पदों को तुरंत नहीं भरा गया, तो स्कूल छोड़ने वाले बच्चों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

वर्तमान में जंजैहली स्कूल के अंदर कॉमर्स के शिक्षक, एक टीजीटी आर्ट्स और एक एलटी का पद पूरी तरह खाली चल रहा है। इसके साथ ही गैर-शिक्षण स्टाफ में भी वरिष्ठ सहायक और एक लिपिक का पद खाली होने से स्कूल का प्रशासनिक काम भी पूरी तरह ठप पड़ा है।

प्रधानाचार्य की सफाई और विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला

इस पूरे मामले पर स्कूल के प्रधानाचार्य राजेश सैनी ने सफाई देते हुए कहा कि कुल 596 दाखिले हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ बच्चों ने अपनी व्यक्तिगत समस्याओं के चलते स्कूल छोड़ा है, जिसमें प्राइमरी सेक्शन के पांच और छठी से बारहवीं कक्षा के 14 बच्चे शामिल हैं।

दूसरी तरफ, इस गंभीर मुद्दे को लेकर राज्य की सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है। सराज के विधायक और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनता को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना दिखाकर पूरी तरह धोखा दिया है।

Author: Sunita Gupta

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