बैलेंस्ड डाइट के बाद भी कम नहीं हो रहा पेट का जिद्दी फैट? जानिए इसके पीछे छिपे 7 मुख्य कारण

Mumbai News: अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर वे केवल हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट खा रहे हैं, तो उनका पेट अपने आप अंदर चला जाएगा। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार ऐसा हर बार मुमकिन नहीं होता है। कई बार सख्त फूड कंट्रोल और मीठा छोड़ने के बाद भी पेट की जिद्दी चर्बी वैसी ही बनी रहती है।

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स्ट्रेस हार्मोन और नींद की कमी बढ़ाती है पेट का फैट

इसका मुख्य कारण सिर्फ आपका भोजन नहीं, बल्कि कई और चीजें भी होती हैं। यह सीधे तौर पर हमारी मेटाबॉलिक हेल्थ, हार्मोन्स और रोजमर्रा की खराब आदतों से जुड़ी होती हैं। लगातार स्ट्रेस लेने से शरीर में कॉर्टिसोल नामक हार्मोन का लेवल काफी तेजी से बढ़ जाता है। यह हार्मोन पेट के आसपास फैट जमा करता है।

यदि आप मानसिक रूप से परेशान रहते हैं या नींद पूरी नहीं लेते, तो डाइट कितनी भी हेल्दी क्यों न हो, फैट घटने में बड़ी मुश्किल आती है। हर दिन 7 से 8 घंटे की गहरी नींद न लेना भी वजन घटाने में सबसे बड़ी रुकावट बनता है। नींद की कमी से भूख बढ़ाने वाले घ्रेलिन हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है।

फिजिकल एक्टिविटी और कैलोरी काउंट का रखें पूरा ध्यान

सिर्फ सही डाइट लेना काफी नहीं होता है, क्योंकि बिना रेगुलर एक्सरसाइज के जिद्दी फैट बर्न होना बहुत मुश्किल है। इसके लिए दिन में कम से कम 30 से 40 मिनट की वॉक, योगा या कार्डियो ट्रेनिंग बेहद जरूरी है, जिससे बॉडी तेजी से एक्स्ट्रा कैलोरी बर्न कर सके और फैट आसानी से घट सके।

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कई बार लोग सोचते हैं कि हेल्दी फूड जैसे ड्राई फ्रूट्स, स्मूदी या ओट्स कम कैलोरी वाले होते हैं। लेकिन इन्हें जरूरत से ज्यादा मात्रा में खाना भी शरीर का वेट बढ़ा देता है। इसके अलावा थायरॉइड, पीसीओडी या इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी हार्मोनल इंबैलेंस की स्थितियों में भी पेट के हिस्से से वजन कम होना काफी मुश्किल हो जाता है।

अक्सर लोग वेट लॉस के चक्कर में बहुत कम खाना खाने लगते हैं। इससे बॉडी अचानक स्टार्वेशन मोड में चली जाती है और शरीर फैट बर्न करने के बजाय उसे स्टोर करने लगता है। इसके साथ ही कम पानी पीने से शरीर के टॉक्सिंस बाहर नहीं निकल पाते और मेटाबॉलिज्म बेहद धीमा पड़ जाता है।

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