हिमाचल में हो रहा डीएसपी का उत्पीड़न, एससी कमीशन ने भेजा नोटिस; दलित नेताओं में उठाई डीजीपी को हटाने की मांग

Shimla News: हिमाचल प्रदेश पुलिस डिपार्टमेंट में चल रहा विवाद अब नेशनल लेवल पर पहुंच गया है। नेशनल शेड्यूल कास्ट कमिशन ने डीएसपी विजय कुमार के उत्पीड़न मामले में बड़ा एक्शन लिया है। कमिशन ने सीधे डीजीपी को नोटिस देकर पंद्रह दिन में इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है。

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डीएसपी विजय कुमार वर्तमान में शिमला पुलिस हेडक्वार्टर में तैनात हैं। उन्होंने बीते तीन जून को नेशनल कमिशन को एक लिखित शिकायत भेजी थी। इस शिकायत में सीनियर अफसरों पर जानबूझकर जाति के आधार पर हैरेसमेंट करने का बड़ा आरोप लगाया गया था। इसके बाद कमिशन ने मामले का संज्ञान लिया।

कमिशन के सीनियर इन्वेस्टिगेटर प्रवीण चंद्र दियुंडी ने पुलिस डिपार्टमेंट को एक सख्त वार्निंग दी है। इस नोटिस में यह बात बिल्कुल स्पष्ट तौर पर बता दी गई है। पंद्रह दिन में सही रिस्पांस न मिलने पर बहुत सख्त लीगल एक्शन लिया जाएगा। डिपार्टमेंट को इस डेडलाइन का कड़ाई से पालन करना होगा।

डीजीपी और बड़े अफसरों को मिल सकता है लीगल समन

कमिशन ने साफ कहा है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर सिविल कोर्ट की पावर का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके तहत डीजीपी और अन्य सीनियर अफसरों को व्यक्तिगत तौर पर पेश होने के लिए समन जारी हो सकता है। यह कदम पुलिस डिपार्टमेंट के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है।

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इस नोटिस की एक कॉपी शिकायतकर्ता डीएसपी विजय कुमार को भी फॉरवर्ड की गई है। इससे यह बात एकदम साफ हो जाती है कि मामले की मॉनिटरिंग सीधे दिल्ली से हो रही है। अब आगे का पूरा एक्शन पुलिस हेडक्वार्टर की तरफ से भेजी जाने वाली रिपोर्ट पर ही डिपेंड करेगा।

इस पुलिस विवाद की शुरुआत एक अजीब इंसिडेंट से हुई थी। आरोप है कि डीएसपी ने अपने एक पूर्व एसएसपी को सरकारी गाड़ी में लिफ्ट दी थी। इस बात से नाराज होकर सीनियर अफसरों ने उनकी गाड़ी वापस ले ली थी। इससे पुलिस डिपार्टमेंट की इंटरनल पॉलिटिक्स सामने आ गई।

गाड़ी छीने जाने की घटना से डीएसपी विजय कुमार बहुत ज्यादा आहत हुए थे। उन्होंने अपने अपमान का विरोध करते हुए छोटा शिमला पुलिस स्टेशन में एक ऑफिशियल जीडी भी दर्ज कराई थी। अब इसी पुराने विवाद में जातिगत हैरेसमेंट का नया एंगल जुड़ने से महकमे में हलचल मच गई है।

दलित नेताओं ने चीफ मिनिस्टर से की एक्शन की मांग

जैसे ही यह मामला कमिशन में पहुंचा, कई सोशल लीडर्स डीएसपी के सपोर्ट में आ गए। दलित लीडर रवि कुमार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है। उन्होंने चीफ मिनिस्टर सुखविंदर सिंह सुक्खू से एक बड़ी डिमांड की है। मामले में सीधे तौर पर निष्पक्ष इन्वेस्टिगेशन होनी चाहिए।

रवि कुमार ने इस पूरे मामले में एक और भी बहुत खास मांग सबके सामने रखी है। इन्वेस्टिगेशन पूरी तरह से फेयर होने तक डीजीपी को उनके वर्तमान पद से तुरंत हटा देना चाहिए। उनका स्पष्ट मानना है कि पुलिस चीफ के पद पर रहते हुए न्यूट्रल जांच संभव नहीं है।

एक अन्य युवा नेता आशीष कुमार ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि एक सीनियर अधिकारी का इस तरह से हैरेसमेंट होना बेहद गंभीर बात है। इस तरह के संवेदनशील मामले का कमिशन तक पहुंचना हैरान करता है। यह पुलिस सिस्टम की कार्यप्रणाली पर कई बहुत बड़े सवाल खड़े करता है।

नेताओं का साफ कहना है कि नोटिस जारी करना एक वेलकम स्टेप है। लेकिन इस मामले में सिर्फ फॉर्मेलिटी काफी नहीं है। इस मामले में जो भी लोग दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त लीगल एक्शन होना चाहिए। किसी भी दोषी अफसर को कोई भी पॉलिटिकल या एडमिनिस्ट्रेटिव सपोर्ट बिल्कुल नहीं मिलना चाहिए।

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