New Delhi News: हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत का बहुत महत्व है। इस बार परम एकादशी का व्रत 11 जून 2026 को रखा जाएगा। इसे अधिकमास की एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से यह व्रत करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
यह दुर्लभ व्रत मोक्ष और अपार सुख-समृद्धि देने वाला माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन श्री हरि की आराधना करने से जीवन में दरिद्रता दूर होती है। व्रत करने वाले व्यक्ति पर माता लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है। सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती है।
परमा एकादशी 2026 के शुभ मुहूर्त
परम एकादशी पर पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। सुबह का उत्तम मुहूर्त 05:23 से 07:07 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:53 से दोपहर 12:49 तक है। इसके अलावा लाभ और उन्नति का मुहूर्त दोपहर 12:21 से 02:05 बजे तक रहेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी है।
व्रत की संपूर्ण पूजा विधि
व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद अपने घर के मंदिर की साफ-सफाई करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं। हाथ में थोड़ा सा जल और अक्षत लेकर अपने व्रत का संकल्प लें। इससे पूजा का फल मिलता है।
संकल्प के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी पर गंगाजल छिड़कें। आप चाहें तो उन्हें गंगाजल से स्नान भी करा सकते हैं। अब भगवान को पीले फूल, ताजे फल, मिठाई और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। ध्यान रखें कि इस व्रत में अन्न का सेवन बिल्कुल मना है।
पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जाप जरूर करें। फिर परमा एकादशी की पावन व्रत कथा पढ़ें। अंत में भगवान की आरती करें। व्रत खोलने का समय 12 जून 2026 को सुबह 05:23 से 08:10 के बीच रहेगा। व्रत खोलने से पहले जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा देना शुभ होता है।
दरिद्रता दूर करने वाली व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में काम्पिल्य नगर में सुमेधा नाम का एक ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी का नाम पवित्रा था जो अत्यंत सती और साध्वी थी। यह दंपति बहुत ही गरीब था लेकिन वे पूरी तरह से धार्मिक थे। गरीबी के कारण वे अक्सर बहुत परेशान और दुखी रहते थे।
एक दिन ब्राह्मण ने धन कमाने के लिए परदेश जाने का विचार किया। लेकिन उसकी पत्नी ने उसे समझाया कि धन और संतान पूर्वजन्म के पुण्यों से मिलते हैं। इसलिए हमें धैर्य रखना चाहिए और भगवान पर भरोसा करना चाहिए। कुछ दिनों बाद महर्षि कौडिन्य अचानक उस ब्राह्मण के घर पधारे।
ब्राह्मण और उसकी पत्नी ने महर्षि की बहुत सेवा की। उनकी सेवा से प्रसन्न होकर महर्षि ने उन्हें परमा एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस व्रत और रात्रि जागरण से जीवन की सारी दरिद्रता मिट जाती है। दोनों ने पूरी श्रद्धा से व्रत किया और अपार सुख प्राप्त किया।
Author: Pandit Balkrishan Sharma

