Beed News: महाराष्ट्र के बीड जिले का एक 24 वर्षीय ग्राफिक डिजाइनर म्यांमार के खतरनाक साइबर फ्रॉड गिरोह के जाल में फंस गया है। बंधक बनाए गए इस युवक ने किसी तरह अपने परिवार को फोन किया। उसने बताया कि वहां करीब 800 भारतीय युवा इस यातना शिविर में बंद हैं।
सोशल मीडिया पर मोटी सैलरी का झांसा देकर बैंकॉक बुलाया
पीड़ित युवक बीड जिले के कैज तहसील के अंतर्गत आने वाले नंदुरघाट का निवासी है। साइबर पुलिस के मुताबिक जालसाजों ने सोशल मीडिया पर उसे एक आकर्षक जॉब ऑफर दिया था। इसमें उसे 70,000 रुपये मासिक वेतन पर बैंकॉक में ग्राफिक डिजाइनिंग और डेटा एंट्री का काम मिला था।
यह युवक सुनहरे भविष्य की चाह में बीते 4 जून को पुणे से बैंकॉक के लिए रवाना हुआ था। वहां हवाई अड्डे पर उतरते ही अपराधियों ने उसे अगवा कर लिया। इसके बाद गिरोह उसे जबरन थाईलैंड-म्यांमार बॉर्डर पर स्थित एक बेहद गुप्त टॉर्चर कैंप में ले गया।
व्हाट्सएप मैसेज से पत्नी को भेजी टॉर्चर कैंप की भयावह जानकारी
वहां पहुंचते ही बदमाशों ने उसके सारे जरूरी दस्तावेज और पासपोर्ट छीन लिए। इस भयानक कैद से युवक ने चुपके से व्हाट्सएप के जरिए अपनी पत्नी से संपर्क साधा। उसने बताया कि वहां बंधक बनाए गए सैकड़ों युवाओं में महाराष्ट्र के भी 20-25 लड़के शामिल हैं।
अपराधी इन बंधकों से रोजाना 16 से 18 घंटे जबरन अवैध काम करवाते हैं। जो भी युवक उनके कहे अनुसार काम करने से मना करता है, उसे बिजली के तेज झटके दिए जाते हैं। विरोध करने पर अब तक दो-तीन कैदियों की पीट-पीटकर हत्या भी की जा चुकी है।
बीड पुलिस ने दर्ज की एफआईआर, विदेश मंत्रालय से मांगी मदद
पति का संदेश मिलते ही पीड़ित महिला ने तुरंत बीड साइबर पुलिस स्टेशन में मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बीड साइबर पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर नीलेश केले ने बताया कि यह एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय मामला है। स्थानीय पुलिस ने इस विषय में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को पूरी जानकारी भेज दी है। फिलहाल इस मामले की जांच में कई केंद्रीय एजेंसियां जुटी हुई हैं।

