Gorakhpur News: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में हत्या के बाद नाले में दफनाई गई महिला और उसकी करीब तीन महीने की मासूम बच्ची के शव की पहचान तीन महीने बीत जाने के बाद भी नहीं हो सकी है। पहचान न हो पाने के कारण पुलिस की जांच लगातार उलझती जा रही है।
गुलरिहा पुलिस ने 1200 लोगों से की पूछताछ, फिर भी खाली हाथ
गुलरिहा थाना पुलिस इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाने के लिए अब तक 1200 से अधिक लोगों से सघन पूछताछ कर चुकी है। इसके अलावा 75 आशा बहुओं के बयान दर्ज किए गए हैं और 100 से ज्यादा संदिग्ध मोबाइल नंबरों के कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR) खंगाले जा चुके हैं।
गोरखपुर के जैनपुर गांव के चोरहिया नाले में बीती 30 अप्रैल 2026 को इन दोनों के शव बरामद हुए थे। शिनाख्त के लिए पुलिस ने जिले के सभी थानों में दर्ज गुमशुदगी और अपहरण के मुकदमों का मिलान किया। इसके साथ ही पड़ोसी जिलों महराजगंज और कुशीनगर में भी संपर्क साधा गया।
अस्पतालों के डिलीवरी रिकॉर्ड खंगालने के बाद भी नहीं मिला सुराग
जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग के जरिए घटना से तीन महीने पहले सरकारी और निजी अस्पतालों में जन्मी बच्चियों का पूरा रिकॉर्ड खंगाला। पुलिस की टीमें जब रिकॉर्ड में दर्ज संबंधित पतों पर तस्दीक के लिए पहुंचीं, तो सभी नवजात बच्चियां अपने घरों में पूरी तरह सुरक्षित मिलीं।
अस्पतालों के रिकॉर्ड से कोई सुराग न मिलने के बाद पुलिस का शक और गहरा गया है। आशंका जताई जा रही है कि मृतका और बच्ची गोरखपुर की न होकर किसी दूसरे जिले या पड़ोसी राज्य की निवासी हो सकती हैं। पुलिस अब प्रवासी मजदूरों के रिकॉर्ड भी चेक कर रही है।
चार विशेष पुलिस टीमें हर संभावित एंगल पर कर रही हैं छानबीन
तकनीकी पहलुओं पर काम करते हुए पुलिस ने घटनास्थल और उसके आसपास के टावर लोकेशन का गहन विश्लेषण किया है। इलाके के ईंट-भट्टों पर काम करने वाले मजदूरों से भी लंबी पूछताछ की गई है, लेकिन अभी तक कोई भी ऐसा चश्मदीद सामने नहीं आया जो दोनों की पहचान कर सके।
एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि महिला और बच्ची की पहचान न हो पाने से विवेचना पर बुरा असर पड़ रहा है। शवों की शिनाख्त होते ही हत्या की मुख्य वजह और आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। फिलहाल पुलिस की चार विशेष टीमें हर संभावित एंगल पर काम कर रही हैं।

