भारतीय चाय उद्योग में ऐतिहासिक मोड़, अब असम में होगा जापानी ‘माचा टी’ का कमर्शियल प्रोडक्शन

Guwahati News: भारत में चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि एक गहरी भावना और खान-पान की समृद्ध संस्कृति है। देश के चाय इतिहास में अब एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा मोड़ आया है। जापानी संस्कृति से जुड़ी मशहूर गहरे हरे रंग की ‘माचा (Matcha) चाय’ का अब भारत में ही कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो गया है।

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असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने एक ऑफिशियल अनाउंसमेंट में बताया कि असम माचा चाय का कमर्शियल प्रोडक्शन करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस खास जापानी वैरायटी की चाय का उत्पादन असम के तिनसुकिया जिले में स्थित प्रसिद्ध ‘छोटा टिंगराई टी एस्टेट’ में सफलतापूर्वक शुरू किया गया है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

इस ऐतिहासिक अचीवमेंट के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर विस्तृत जानकारी शेयर करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने इसे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह बड़ी उपलब्धि असम की समृद्ध चाय विरासत को वैश्विक स्तर पर और ज्यादा मजबूत करेगी तथा राज्य के पूरे चाय उद्योग की तस्वीर बदल देगी।

मुख्यमंत्री ने चाय प्रेमियों को बधाई देते हुए लिखा कि अब आपकी पसंदीदा प्रीमियम माचा चाय सीधे असम के बागानों में तैयार की जाएगी। तिनसुकिया के छोटा टिंगराई टी एस्टेट से शुरू हुआ यह कमर्शियल प्रोडक्शन भारतीय कृषि और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए आने वाले समय में एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है।

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गुवाहाटी ऑक्शन सेंटर में तीन हजार रुपये किलो बिकी माचा चाय

हाल के वर्षों में अपनी फिटनेस और हेल्थ बेनिफिट्स के कारण दुनिया भर में पॉपुलर हुई माचा चाय इंटरनेशनल मार्केट में असम के चाय ब्रांड को एक नई और मजबूत पहचान देगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नए प्रोजेक्ट के तहत तैयार पहली चाय की खेप को मार्केट में बेहद शानदार और रिकॉर्ड रिस्पॉन्स मिला है।

छोटा टिंगराई टी एस्टेट में बनी इस प्रीमियम माचा चाय का शुरुआती पांच किलोग्राम का पहला स्पेशल बैच गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र (GTAC) में बेचा गया। इस नीलामी में गुवाहाटी के ही एक बड़े लोकल खरीदार ने इस स्वदेशी माचा चाय को तीन हजार रुपये प्रति किलोग्राम की रिकॉर्ड कीमत पर खरीद कर इतिहास रच दिया।

भारत और जापान के बीच बेहतरीन टेक्निकल को-ऑपरेशन की सफलता

इस टी एस्टेट ने साल 2016 में ही अपने परिसर के भीतर जापानी चाय बनाने की एक एडवांस और मॉडर्न फैसिलिटी स्थापित कर ली थी। तब से यहां की टीम ग्रीन टी और अन्य वैरायटी बनाने के लिए जापान के टॉप एग्रीकल्चर और टी एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर लगातार काम कर रही थी।

मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने इस प्रोजेक्ट को भारत और जापान के बीच टेक्निकल को-ऑपरेशन की एक शानदार और बड़ी सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि यह इनोवेटिव पहल असम के चाय उत्पादकों (Tea Growers) के लिए ग्लोबल मार्केट में कमाई के नए दरवाजे खोलेगी और इससे भारत की विदेशी इनपुट पर निर्भरता भी काफी कम होगी।

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