Uttarakhand News: उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में आसमान से बरस रही भीषण आग और चिलचिलाती धूप से राहत पाने के लिए सैलानियों ने अब भारी संख्या में पहाड़ों का रुख करना शुरू कर दिया है। इसके चलते उत्तराखंड के तमाम प्रसिद्ध पर्यटन स्थल इस समय देश-दुनिया के पर्यटकों से पूरी तरह पैक हो चुके हैं।
मैदानी क्षेत्रों में बढ़ती तपिश के कारण मसूरी, नैनीताल, धनौल्टी, चकराता, रानीखेत, टिहरी और औली जैसे खूबसूरत पहाड़ी इलाकों में सामान्य दिनों की तुलना में कहीं अधिक पर्यटक उमड़ रहे हैं। हालांकि, पहाड़ों पर वाहनों की इस भारी आमद के कारण लग रहे लंबे ट्रैफिक जाम ने पर्यटकों का पसीना छुड़ा दिया है।
सैलानियों की इस भारी भीड़ की वजह से मसूरी और नैनीताल के मुख्य मार्गों पर लग रहे जाम से लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए प्रशासन ने भीड़ बढ़ते ही दोनों प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विशेष शटल बसों की सेवा भी शुरू कर दी है।
मैदानी क्षेत्रों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के चलते पर्वतीय क्षेत्रों का यह ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन इस समय अपने पूरे शबाब पर है। बुधवार को अकेले नैनीताल शहर में ही करीब सात हजार से अधिक नए सैलानियों के पहुंचने का एक अनुमान जिला प्रशासन द्वारा लगाया गया है।
नैनीताल की आंतरिक सड़कों पर रेंगता नजर आया यातायात
वीकेंड न होने की वजह से यद्यपि मुख्य हाईवे पर वाहनों की आवाजाही सामान्य रूप से चलती रही, लेकिन नैनीताल शहर के भीतर माल रोड सहित अन्य आंतरिक सड़कों पर यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। शहर में पर्याप्त पार्किंग स्थलों के अभाव के कारण यह समस्या और ज्यादा बढ़ गई है।
नैनीताल के प्रसिद्ध मस्जिद चौराहा, चिड़ियाघर रोड और मेट्रोपोल रोड जैसे व्यस्त इलाकों में दिन भर में कई बार लंबा जाम लगा। इसके अलावा हल्द्वानी, कालाढूंगी और भवाली मार्ग पर भी गाड़ियां रेंगती हुई नजर आईं, जिससे गंतव्य तक पहुंचने में लोगों को काफी समय लगा।
इस बीच, नैनी झील में नौका विहार करने वाले शौकीन लोगों का पूरे दिन तांता लगा रहा। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के पीआरओ रुचिर साह के अनुसार, बाबा नीब करौरी के कैंची धाम के प्रति देश भर में बढ़ती अगाध आस्था के कारण इस बार गुजरात से आने वाले पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मसूरी में भी बुधवार को सभी छोटे-बड़े होटल, लॉज और गेस्ट हाउस पूरी तरह से पैक नजर आए। पर्यटन कारोबारियों के चेहरे खिले हुए हैं, लेकिन अचानक बढ़ी गाड़ियों की संख्या को नियंत्रित करना स्थानीय पुलिस और प्रशासन के लिए इस समय एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
Author: Harish Rawat

