Ahilyanagar News: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने देश की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने शनिवार को साफ तौर पर कहा कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना अब केवल सशस्त्र बलों के भरोसे नहीं रह सकती। भविष्य के युद्धों में जीत हासिल करने के लिए घरेलू उद्योगों और स्वदेशी तकनीक को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
बदल रही है युद्ध कला और रणनीति
महाराष्ट्र के शिरडी में निबे लिमिटेड के रक्षा परिसर के उद्घाटन पर सीडीएस ने वैश्विक सैन्य बदलावों का जिक्र किया। जनरल चौहान ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ इंसानी ताकत या पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं है। अब तकनीक और नवाचार ही किसी भी देश की जीत और हार का सबसे बड़ा फैसला करेंगे।
डिजिटल और अंतरिक्ष क्षेत्र बनेगा नया युद्धक्षेत्र
सीडीएस ने आगाह किया कि भविष्य के संघर्ष बहु-क्षेत्रीय होंगे। अब जमीन, समुद्र और हवा के साथ-साथ साइबर और अंतरिक्ष में भी एक साथ युद्ध लड़े जाएंगे। आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन, स्वायत्त प्लेटफॉर्म और डेटा नेटवर्क ही किसी भी देश के रक्षा तंत्र के लिए मुख्य हथियार बनेंगे।
स्वदेशी रक्षा उत्पादन में भारत का नया रिकॉर्ड
जनरल चौहान ने भारतीय सेना की क्षमताओं की तारीफ करते हुए मजबूत आपूर्ति श्रृंखला की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन आज 1.27 लाख करोड़ रुपए के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुका है। इसके साथ ही देश का रक्षा निर्यात भी अब 38,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।
पूरी दुनिया में बढ़ रहा भारतीय हथियारों का डंका
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने बताया कि भारत वर्तमान में दुनिया के 100 से अधिक देशों को अपने रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहा है। इस शानदार उपलब्धि में निजी क्षेत्र की कंपनियां बहुत बड़ी भूमिका निभा रही हैं। निबे लिमिटेड जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भारत की स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमताओं में बढ़ते भरोसे का प्रतीक हैं।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी. कामत और दक्षिणी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भी मौजूद रहे। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सेना और निजी उद्योगों का यह तालमेल भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ वैश्विक बाजार में भी बड़ी पहचान दिलाएगा।
Author: Harikarishan Sharma

