New Delhi News: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि उसने उन लोगों को वापस लाने का निर्णय लिया है जिन्हें पहले बांग्लादेश भेज दिया गया था। सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि वापसी के बाद इन व्यक्तियों के भारतीय नागरिकता दावों की विस्तृत जांच की जाएगी और उसी आधार पर भविष्य के कदम उठाए जाएंगे।
असाधारण मामलों में केंद्र का रुख
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष यह जानकारी रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय मामले की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। इस कार्रवाई को भविष्य के लिए कोई मिसाल के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
केंद्र सरकार ने बताया कि संबंधित व्यक्तियों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया में लगभग आठ से दस दिनों का समय लग सकता है। नागरिकता के दर्जे की जांच पूरी होने तक उन्हें निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना होगा। फिलहाल इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने जुलाई की तारीख तय की है।
हाई कोर्ट के फैसले को दी गई थी चुनौती
सुप्रीम कोर्ट कलकत्ता हाई कोर्ट के छब्बीस सितंबर, दो हजार पच्चीस के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार कर रहा था। हाई कोर्ट ने अपने पिछले फैसले में सोनाली खातून और अन्य लोगों को बांग्लादेश भेजने के केंद्र के निर्णय को अवैध करार दिया था और उसे रद्द कर दिया था।
गौरतलब है कि पिछले साल तीन दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर खातून और उनके आठ वर्षीय बच्चे को भारत में प्रवेश करने की अनुमति दी थी। यह अनुमति तब दी गई थी जब उन्हें बांग्लादेश भेजे जाने का घटनाक्रम कुछ महीने पहले ही पूरा हुआ था। अब सरकार के इस नए फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Author: Harikarishan Sharma


