पीएम मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति की महाबैठक में हुए कई ऐतिहासिक समझौते, क्या यूरोपीय देशों में भी बजेगा भारत का डंका?

Delhi News: वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत और यूरोपीय देशों के रणनीतिक रिश्तों में अभूतपूर्व मजबूती आई है। इसी कड़ी में एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले बेहद महत्वपूर्ण देश साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स भारत के दौरे पर आए हैं। इस ऐतिहासिक मुलाकात ने कूटनीति का एक बिल्कुल नया अध्याय लिख दिया है।

पीएम मोदी और राष्ट्रपति निकोस के बीच हुए चौदह ऐतिहासिक कूटनीतिक करार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और साइप्रस के राष्ट्रपति के बीच हुई महाबैठक में कुल 14 अहम समझौतों पर मुहर लगी है। भारत अब वैश्विक पटल पर छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण देशों के साथ अपने संबंधों को नई ऊंचाइयां दे रहा है। दोनों नेताओं ने नई दिल्ली में कई अहम मुद्दों पर सीधी और सकारात्मक चर्चा की।

इस द्विपक्षीय बातचीत के दौरान साइप्रस ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख का खुलकर समर्थन किया। इन नए समझौतों की वजह से अब यूरोपीय यूनियन के बाजारों तक भारत की आर्थिक और सामरिक पहुंच बेहद मजबूत हो जाएगी। वहीं निवेश और व्यापार के मोर्चे पर साइप्रस को भी भारत जैसा एक भरोसेमंद साथी मिल गया है।

हैदराबाद हाउस में हुआ भव्य स्वागत, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर दिया जोर

दिल्ली के प्रतिष्ठित हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति निकोस और उनके उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और साइप्रस के पुराने ऐतिहासिक रिश्ते लोकतंत्र, कानून के शासन और संप्रभुता के आपसी सम्मान जैसे बेहद मजबूत और साझा मूल्यों पर टिके हुए हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक दशक के भीतर साइप्रस की तरफ से भारत में होने वाला पूंजी निवेश लगभग दोगुना हो चुका है। दोनों मित्र देशों ने अब आगामी पांच वर्षों में इस निवेश राशि को दोबारा दोगुना करने का एक बड़ा और महत्वाकांक्षी रणनीतिक लक्ष्य तय किया है।

विशाल बिजनेस डेलिगेशन और दिग्गज अधिकारियों का भारत आगमन

विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने राष्ट्रपति निकोस की इस यात्रा पर एक विशेष प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति के साथ भारत आए इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में साइप्रस के परिवहन, संचार, डिजिटल पॉलिसी और अनुसंधान मंत्रालयों के कई शीर्ष उप-मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

द्विपक्षीय संबंधों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के उद्देश्य से साइप्रस के 60 प्रमुख उद्योगपतियों का एक विशाल कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी इस दौरे का हिस्सा बना है। यह डेलिगेशन भारतीय उद्योगों के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में निवेश और नई व्यापारिक साझेदारी की संभावनाओं को तलाशेगा।

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का नौवां सबसे बड़ा स्रोत बना साइप्रस

सिबी जॉर्ज के अनुसार साइप्रस भारत में एफडीआई (FDI) निवेश करने वाला दुनिया का नौवां सबसे बड़ा देश है। यूरोपीय यूनियन के भीतर नीदरलैंड के बाद साइप्रस ही भारत के लिए दूसरा सबसे बड़ा निवेश स्रोत बनकर उभरा है। साल 2000 से लेकर अब तक वहां से कुल 16 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है।

साइप्रस से आने वाला यह भारी-भरकम निवेश मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर-हार्डवेयर, ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग, कार्गो हैंडलिंग, कंस्ट्रक्शन, शिपिंग और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में फैला है। रक्षा और समुद्री सुरक्षा सहयोग भी अब दोनों देशों के आपसी संबंधों को मजबूत बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरे हैं।

द्विपक्षीय रक्षा सहयोग कार्यक्रम 2026 और यूपीआई सेवा का विस्तार

दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करने के लिए ‘द्विपक्षीय रक्षा सहयोग कार्यक्रम 2026’ की मजबूत रूपरेखा तैयार की गई है। इसके साथ ही डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए एक और बड़ा ऐलान हुआ है। अगले साल से साइप्रस में भारत की लोकप्रिय यूपीआई (UPI) सेवा आधिकारिक तौर पर शुरू हो जाएगी।

Author: Harikarishan Sharma

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