Delhi News: सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को भरोसा दिया है कि नागरिकता के संदेह में बांग्लादेश भेजे गए लोगों को वापस लाया जाएगा। देश वापस लाकर ही उनकी भारतीय नागरिकता के दावों की गहन जांच की जाएगी।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ के सामने यह आश्वासन दिया। केंद्र सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें बंगाली भाषी लोगों को वापस लाने का निर्देश दिया गया था।
कलकत्ता हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ अपील
सुप्रीम कोर्ट असल में कलकत्ता हाई कोर्ट के 26 सितंबर 2025 के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। हाई कोर्ट ने सुनाली खातून और अन्य लोगों को अवैध अप्रवासी बताकर बांग्लादेश निर्वासित करने के सरकारी आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया था।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल दिसंबर में विशुद्ध मानवीय आधार पर सुनाली खातून और उनके आठ साल के बच्चे को भारत में प्रवेश की अनुमति दी थी। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को बच्चे की उचित देखभाल और गर्भवती महिला को मुफ्त चिकित्सा सहायता देने का निर्देश दिया था।
दिल्ली के रोहिणी में दिहाड़ी मजदूरी करते थे पीड़ित परिवार
सुनाली खातून के पिता भोदु शेख ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक उनका परिवार पिछले दो दशकों से दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 26 में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहा था। पुलिस ने अचानक उन्हें हिरासत में लेकर सीमा पार भेज दिया था।
भोदु शेख ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी, दामाद और मासूम नाती को दिल्ली पुलिस ने जल्दबाजी में पकड़ा था। इसी तरह बीरभूम के आमिर खान ने भी याचिका दायर कर अपनी बहन स्वीटी बीबी और उनके दो बच्चों को जबरन पड़ोसी देश भेजने का दावा किया था।
निर्वासन के तय सरकारी नियमों के उल्लंघन पर कोर्ट सख्त
हाई कोर्ट ने पाया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2 मई 2025 को अवैध प्रवासियों को वापस भेजने के लिए एक विशेष नियम जारी किया था। इसके तहत किसी भी राज्य में अनाधिकृत रूप से रह रहे संदिग्धों की पहले स्थानीय स्तर पर पूरी जांच होनी चाहिए।
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि अधिकारियों ने इस मामले में तय नियमों का उल्लंघन किया है। बिना पूरी जांच के दिखाई गई इस तरह की जल्दबाजी देश के न्यायिक माहौल को बिगाड़ सकती है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई जुलाई में करेगा।
चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब के मुख्यमंत्री के खिलाफ दी अर्जी
इस बीच कानूनी गलियारों से एक और बड़ी खबर सामने आई है। चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एक फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर दर्ज दंगा मामला रद्द कर दिया था।
यह पूरा मामला साल 2020 में बिजली दरों में हुई भारी बढ़ोतरी के खिलाफ चंडीगढ़ में आयोजित एक बड़े राजनीतिक प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। चंडीगढ़ प्रशासन ने आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेताओं के खिलाफ दर्ज केस को बहाल करने की मांग की है।
Author: Gaurav Malhotra


