पश्चिम एशिया संकट के बीच पीएम मोदी का ‘एनर्जी ब्लूप्रिंट’: बायोगैस और आत्मनिर्भरता पर महाबैठक

Delhi News: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी गतिरोध के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की एक मैराथन बैठक की। करीब 4.5 घंटे तक चली इस बैठक में पीएम ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता और वैकल्पिक स्रोतों पर विशेष जोर दिया।

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पीएम मोदी ने मंत्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे एलपीजी (LPG) के विकल्प के रूप में बायोगैस को तेजी से बढ़ावा दें। वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं को देखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अब पारंपरिक ईंधन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी रणनीति अपनानी होगी।

बैठक में पीएम मोदी ने भविष्य की चुनौतियों को भांपते हुए मंत्रियों को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को राजनीतिक नारे से ऊपर उठकर एक प्रतिबद्धता के रूप में देखने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी नया सुधार आम जनता के लिए परेशानी का सबब नहीं, बल्कि उनके जीवन को सरल बनाने वाला होना चाहिए।

पीएम मोदी के कड़े निर्देश: ‘काम की गति और कार्यशैली’

प्रधानमंत्री ने मंत्रिपरिषद को साफ संदेश दिया कि अब समय पीछे मुड़कर उपलब्धियां गिनने का नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारियों का है। उन्होंने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिए कि पेंडिंग कार्यों को बिना देरी के पूरा किया जाए। उन्होंने प्रशासन में सरलता लाने और फाइलों के अनावश्यक मूवमेंट को खत्म करने पर विशेष जोर दिया है।

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इस बैठक में कृषि, सड़क परिवहन, विदेश मंत्रालय, पावर और वाणिज्य सहित कई प्रमुख विभागों ने अपने पिछले दो वर्षों के कार्यों और भविष्य की योजनाओं का प्रेजेंटेशन दिया। पीएम ने सभी मंत्रियों को अनावश्यक विवादों से दूर रहकर पूरी तरह से अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी, ताकि प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि हो सके।

ऊर्जा सुरक्षा क्यों है प्राथमिकता?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील तेल मार्ग है, जिससे भारत की तेल और एलपीजी आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी प्रकार की रुकावट का सीधा असर भारत की घरेलू कीमतों पर पड़ता है। सरकार का यह रुख अब स्पष्ट है कि संकट के समय आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता कम करने के लिए स्वदेशी और वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देना अनिवार्य है।

पीएम मोदी का यह ‘एनर्जी ब्लूप्रिंट’ न केवल वर्तमान भू-राजनीतिक संकट को संभालने के लिए है, बल्कि यह भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की एक बड़ी कवायद भी है। सरकार का मानना है कि बायोगैस और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि वे देश की आर्थिक सुरक्षा को भी बाहरी झटकों से सुरक्षित रखने में मदद करेंगे।

Author: Gaurav Malhotra

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