New Delhi News: भारत की राजधानी नई दिल्ली में हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच हुए ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन से पड़ोसी देश चीन पूरी तरह तिलमिला उठा है। इस समिट में दोनों देशों के बीच कई बड़े रणनीतिक करार हुए हैं।
भारत और जापान द्वारा रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक लचीलेपन पर कई समझौतों की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर चीन ने चेतावनी जारी की है। चीन ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग किसी तीसरे पक्ष को टारगेट नहीं करना चाहिए।
आर्थिक और सैन्य सुरक्षा पर दोनों देशों ने पेश किया रोडमैप
चीन की इस गहरी चिंता का मुख्य कारण दिल्ली समिट में घोषित हुए समझौतों की मजबूत प्रकृति है। दोनों देशों ने खुद को केवल पारंपरिक राजनयिक भाषा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को मजबूत करने का एक विस्तृत रोडमैप पेश किया है।
आज के वैश्विक परिदृश्य में ये सभी क्षेत्र रणनीतिक रूप से युद्ध का मैदान बन चुके हैं। सप्लाई चेन में विविधता लाने और किसी एक देश पर निर्भरता कम करने का यह प्रयास सीधे तौर पर चीनी मैन्युफैक्चरिंग पर दुनिया की निर्भरता को कम करने की वैश्विक कोशिशों का एक बड़ा हिस्सा है।
क्रिटिकल मिनरल्स और डिफेंस सेक्टर में चीन को नई चुनौती
इस समिट का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम क्रिटिकल मिनरल्स पर हुआ समझौता रहा। वर्तमान में दुर्लभ खनिजों के प्रोसेसिंग में चीन का वैश्विक एकाधिकार है। चीन ने अतीत में भू-राजनीतिक हथियार के रूप में इन खनिजों के निर्यात पर प्रतिबंध भी लगाए हैं, जिसके खिलाफ अब वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जा रही है।
रक्षा क्षेत्र में पीएम मोदी और ताकाइची ने ‘यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना’ यानी यूनिकॉर्न (UNICORN) नामक पहली संयुक्त रक्षा परियोजना की घोषणा की है। जापानी तकनीक और भारत की औद्योगिक क्षमता का यह मेल भविष्य में उन्नत समुद्री प्लेटफार्मों के निर्माण में एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
ताइवान मुद्दे और क्वाड के बढ़ते प्रभाव से बीजिंग असहज
चीन की चिंताएं जापान की मौजूदा नेता सानाए ताकाइची के सख्त और आक्रामक रुख से और बढ़ गई हैं। ताइवान पर उनके बयान और रक्षा साझेदारी का विस्तार करने की इच्छा ने चीन को परेशान किया है। इस पूरे रणनीतिक नेटवर्क में भारत की भूमिका सबसे अहम हो जाती है।
समिट के दौरान क्वाड (Quad) के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराने से भी बीजिंग बेहद असहज है। संयुक्त बयान में समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई है, जिसे चीन दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में अपने दावों पर सीधे हमले के रूप में देख रहा है।
