आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर नींद की एक झपकी बनी काल, पलटी बस में सात यात्रियों की दर्दनाक मौत

Uttar Pradesh News: आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर मंगलवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। तेज रफ्तार स्लीपर बस अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराई और पलट गई। हादसे में सात यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं। शुरुआती जांच में चालक को झपकी आने की बात सामने आई है।

यह हादसा औरास थाना क्षेत्र के नीभाखेड़ा गांव के पास सुबह करीब पांच बजे हुआ। बस में सवार अधिकतर यात्री गहरी नींद में थे। अचानक तेज झटका लगते ही बस डिवाइडर से टकराकर पलट गई और करीब 100 मीटर तक सड़क पर घिसटती चली गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई।

बस पलटते ही मची अफरा-तफरी

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक टक्कर इतनी तेज थी कि कई यात्री सीटों से उछलकर एक-दूसरे पर गिर पड़े। कई लोग सीटों के बीच फंस गए। हादसे में बिहार के एक दरोगा और एक बंदी समेत सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। घायलों ने बताया कि कुछ सेकंड में पूरा मंजर बदल गया।

एक यात्री ने बताया कि हादसे के समय ऐसा लगा जैसे बस गहरी खाई में गिर रही हो। बस के अंदर अंधेरा और अफरा-तफरी थी। लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। कई यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। बचाव दल को लोगों को बाहर निकालने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

क्रेन से उठाई गई क्षतिग्रस्त बस

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पुलिस और राहत टीम ने बस को क्रेन की मदद से उठाया। इस दौरान सीटों के नीचे फंसे शव बाहर गिरने लगे। अधिकारियों के अनुसार कई शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हालत में मिले। कुछ यात्रियों के सिर, छाती और हाथ-पैरों में गंभीर चोटें पाई गईं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मृतकों के शरीर पर गंभीर अंदरूनी चोटों की पुष्टि हुई है। एक बंदी के फेफड़े फटने की बात सामने आई है। डॉक्टरों के मुताबिक हादसे की तीव्रता बहुत ज्यादा थी। इसी कारण कई यात्रियों को जानलेवा चोटें आईं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

ओवरस्पीड और चालक की लापरवाही पर सवाल

प्राथमिक जांच में पुलिस को चालक की लापरवाही और ओवरस्पीडिंग के संकेत मिले हैं। अधिकारियों ने बताया कि बस पहले भी कई बार तेज रफ्तार के कारण चालान झेल चुकी थी। जानकारी के अनुसार वाहन हिमाचल प्रदेश परमिट के बिना संचालित हो रहा था और उस पर 50 हजार रुपये का चालान दर्ज था।

यूपीडा अधिकारियों ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर बसों के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा तय है। इसके बावजूद कई चालक नियमों का पालन नहीं करते। सीसीटीवी कैमरों के पास वाहन की रफ्तार कम की जाती है, लेकिन आगे बढ़ते ही चालक फिर तेज गति पकड़ लेते हैं, जिससे हादसे बढ़ रहे हैं।

Author: Ajay Mishra

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