World News: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच पाकिस्तान और चीन ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक रूप से और मजबूत करने का बड़ा ऐलान किया है। यह घोषणा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीजिंग दौरे के दौरान दोनों देशों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में की गई है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से एक उच्च-स्तरीय बैठक में मुलाकात की। इस द्विपक्षीय वार्ता में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के दूसरे और अधिक उन्नत चरण को जमीन पर पूरी तरह लागू करने पर दोनों शीर्ष नेताओं में आपसी सहमति बनी।
आधिकारिक बयान के मुताबिक दोनों पक्षों ने बहुत ही सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत की। दोनों देश अपनी सर्वकालिक रणनीतिक सहयोग साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। वे इसके लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यापक समझौते पर आधिकारिक तौर पर पहुंच चुके हैं।
बीजिंग और इस्लामाबाद ने चीनी राष्ट्रपति की महत्वाकांक्षी ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल के तहत चल रहे मुख्य प्रोजेक्ट सीपीईसी को तेज रफ्तार से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इसके तहत दोनों देश 1,300 किलोमीटर लंबे प्राचीन कराकोरम राजमार्ग का बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार करेंगे।
सामरिक रूप से बेहद अहम ग्वादर बंदरगाह को बनाएंगे क्षेत्रीय हब
दोनों पड़ोसी देश इसके साथ ही पाकिस्तान के रणनीतिक ग्वादर बंदरगाह का आधुनिक विकास करने के लिए भी सहमत हुए हैं। वे कराकोरम हाईवे के थाकोट-रायकोट मार्ग के री-अलाइनमेंट प्रोजेक्ट को चरणबद्ध और पूरी तरह व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने पर राजी हुए।
वे आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ग्वादर बंदरगाह की पूरी क्षमता का रणनीतिक लाभ उठाएंगे। चीन इस तटीय क्षेत्र को एक बड़े क्षेत्रीयConnectivity हब के रूप में विकसित करेगा। इससे चीन की पहुंच हिंद महासागर और मध्य पूर्व के बाजारों तक बहुत आसान हो जाएगी।
बीजिंग और इस्लामाबाद ने दोनों देशों के बीच जमीनी कनेक्टिविटी को और ज्यादा मजबूत करने के लिए खुंजेराब दर्रे का भी प्रभावी इस्तेमाल करने का फैसला किया है। वे तय मॉडल के तहत इस बड़े प्रोजेक्ट में किसी तीसरे देश की भागीदारी का स्वागत करेंगे।
दोनों पक्ष स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विभिन्न औद्योगिक पार्कों के विकास को तेजी से आगे बढ़ाएंगे। वे कपड़ा और घरेलू उपकरणों जैसे मुख्य मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में नए औद्योगिक सहयोग के कई बड़े और आधुनिक प्रदर्शन प्रोजेक्ट बनाने के लिए भी सहमत हुए हैं।
नई दिल्ली के कड़े और आधिकारिक विरोध को दोनों देशों ने किया दरकिनार
चीन और पाकिस्तान ने सीपीईसी 2.0 के तहत होने वाले इस निर्माण पर नई दिल्ली की सभी गंभीर आपत्तियों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है। यह विवादित मार्ग पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान के क्षेत्रों से होकर गुजरता है।
यह महत्वपूर्ण सड़क ट्रांस-कराकोरम क्षेत्र यानी शक्सगाम घाटी से भी होकर निकलती है। साल 1963 में पाकिस्तान ने एक अवैध समझौते के तहत भारत के इस अभिन्न अंग को चीन को सौंप दिया था। इस क्षेत्र में निर्माण भारत की क्षेत्रीय अखंडता का सीधा उल्लंघन है।
कराकोरम हाइवे को चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे की रीढ़ माना जाता है। भारत सरकार का हमेशा से यह स्पष्ट रुख रहा है कि यह पूरा प्रोजेक्ट देश की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज करके भारतीय सीमा के भीतर से पूरी तरह गैरकानूनी तरीके से बनाया गया है।
Author: Pallavi Sharma


